अयोध्या में आज विवाह पंचमी के शुभ अवसर पर श्रीराम मंदिर के मुख्य शिखर पर ध्वजारोहण समारोह आयोजित हो रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अभिजीत मुहूर्त ये धर्म ध्वजा फहराएंगे। यह ध्वज न सिर्फ मंदिर की भव्यता को निखारेगा, बल्कि रामायण की पौराणिक परंपराओं और हिंदू धर्म के गहन प्रतीकों को भी जीवंत करेगा।
केसरिया रंग की यह धर्म ध्वजा रामायण परंपरा, सूर्यवंशी विरासत और हिंदू धर्म के आध्यात्मिक प्रतीकों का प्रतिनिधित्व करती है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने बताया कि यह ‘धर्म ध्वजा’ मंदिर की आध्यात्मिक ऊर्जा का प्रतीक होगी जो भगवान राम के सूर्यवंशी वंश, ब्रह्मांडीय शक्ति और अयोध्या की प्राचीन राजपरंपरा को प्रतिबिंबित करती है।
श्रीराम मंदिर पर फहराए जाने वाले ध्वज की विशेषताएं
श्रीराम मंदिर के लिए विशेष रूप से तैयार किया गया यह केसरिया धर्म ध्वज अपनी बनावट और डिजाइन में अद्वितीय है। इसका आकार 22 फुट लंबा और 11 फुट चौड़ा हैं। इस ध्वज को मंदिर के 161 फीट ऊंचे शिखर पर फहराया जाएगा। धर्म ध्वजा को हल्के लेकिन अत्यंत मजबूत पैराशूट कपड़े से तैयार किया गया है, जो 200 किलोमीटर प्रति घंटा की तेज हवाओं का सामना कर सकती है। एविएशन-ग्रेड पैराशूट नायलॉन और रेशमी धागों से बनी तीन परतों वाली यह पताका तेज हवा, बारिश और धूप सह सकेगी। 42 फीट के ध्वजदंड पर 360 डिग्री घूमने वाला बॉल-बेयरिंग लगा है। सात कारीगरों ने अपने हाथों से इसे 25 दिन में तैयार किया है। इसमें केसरिया रंग का चयन त्याग, बलिदान, वीरता, ज्ञान और धर्म के प्रति समर्पण के प्रतीक के रूप में किया गया है, जो हिंदू परंपरा में संन्यास और पवित्रता का प्रतीक है।
धर्म ध्वजा पर अंकित प्रतीकों का अर्थ और महत्व
राममंदिर पर फहराए जाने वाले ध्वज पर तीन प्रमुख प्रतीक ॐ, सूर्य और कोविदार वृक्ष उकेरे गए हैं जो रामकथा की जड़ों से जुड़े हैं और धर्म, साहस तथा प्रकृति संरक्षण का संदेश देते हैं।
- सूर्य का अर्थ : यह भगवान राम के सूर्यवंशी कुल को दर्शाता है, जो इक्ष्वाकु वंश की राजसी विरासत का प्रतीक है। वाल्मीकि रामायण में राम को सूर्य की किरणों जैसा तेजस्वी वर्णित किया गया है, जो धर्मराज्य और न्याय की ज्योति का बोध कराता है। यह प्रतीक मंदिर के शिखर पर फहराने से राम के सूर्यवंशीय गौरव को साकार रूप प्रदान करेगा।
- ॐ का अर्थ : हिंदू धर्म का मूल मंत्र ‘ॐ’ ब्रह्मांड की आदि ऊर्जा और सृष्टि के सार को प्रतिनिधित्व करता है। यह पवित्र ध्वनि आध्यात्मिक जागरण, शांति और दिव्यता का प्रतीक है। राम मंदिर की ध्वजा पर इसका अंकन भगवान राम की जन्मभूमि को ब्रह्मांडीय महत्व प्रदान करता है, जो भक्तों को ध्यान और भक्ति की ओर प्रेरित करेगा।
- कोविदार वृक्ष का अर्थ : यह सबसे अनूठा और कम चर्चित प्रतीक है, जो वाल्मीकि रामायण के अयोध्या कांड से लिया गया है। रामायण में कोविदार वृक्ष को अयोध्या की प्राचीन राजपरंपरा का चिह्न माना गया है, जहां इसे राजधानी की सीमाओं पर लगाया जाता था। यह वृक्ष धार्मिक महत्व के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी देता है, क्योंकि रामायण में इसका उल्लेख प्रकृति के संतुलन और वनस्पति की पवित्रता से जुड़ा है।





