समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव और पूर्व मंत्री आजम खान के जौहर ट्रस्ट पर आयकर विभाग ने शिकंजा कस दिया है। दरअसल सरकारी धन के गलत इस्तेमाल के मामले में ट्रस्ट को नोटिस जारी किया गया है। रामपुर जेल में सजा काट रहे आजम खान की मुश्किलें इससे और बढ़ सकती हैं। ट्रस्ट पर आरोप है कि उसने सरकारी जमीन और सरकारी पैसे का गलत इस्तेमाल किया है। सरकारी धन को जौहर यूनिवर्सिटी में लगाया गया। भाजपा विधायक आकाश सक्सेना ने इस मामले में शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने बताया कि ट्रस्ट में आजम खान के परिवार के लोग सदस्य हैं। पूरे मामले में सरकारी धन का गलत इस्तेमाल हुआ है।
दरअसल आयकर विभाग के नोटिस में जौहर ट्रस्ट को दी गई आयकर छूट को रद्द किए जाने को लेकर जवाब मांगा गया है। ट्रस्ट को सामाजिक संस्था होने के आधार पर यह छूट मिली थी। आरोप है कि आजम खान ने जौहर ट्रस्ट के नाम पर सरकारी जमीन और सरकारी पैसे का गलत इस्तेमाल किया। समाज सेवा के लिए बनाए गए इस ट्रस्ट को निजी और पारिवारिक ट्रस्ट में बदल दिया गया। आजम खान पर मंत्री रहते हुए अपने पद का गलत इस्तेमाल करने का भी आरोप है। उन्होंने सरकारी धन को जौहर यूनिवर्सिटी में लगाया।
भाजपा विधायक आकाश सक्सेना ने क्या कहा?
भाजपा विधायक आकाश सक्सेना ने आयकर विभाग के नोटिस को लेकर कई बातें कही हैं। उन्होंने बताया कि जौहर ट्रस्ट में गड़बड़ी की शिकायतें पहले भी बहुत की जा चुकी थीं। इन्हीं शिकायतों के आधार पर आयकर विभाग ने कई बार नोटिस जारी किए थे। लेकिन ट्रस्ट ने कभी उन नोटिसों पर ध्यान नहीं दिया। कभी किसी नोटिस का जवाब भी नहीं दिया गया। आकाश सक्सेना के अनुसार, मौजूदा समय में जौहर यूनिवर्सिटी का ट्रस्ट सबसे बड़ा घोटाला है।
सक्सेना ने इसे ट्रस्ट मानने से इनकार किया
उन्होंने आगे कहा कि आजम खान के ट्रस्ट में एक व्यक्ति को छोड़कर बाकी सभी सदस्य उनके परिवार के हैं। इसमें उनके दोनों बेटे, उनकी पत्नी और उनकी बहन जैसे लोग शामिल हैं, जो पूरी तरह से आजम खान के साथ हैं। सक्सेना ने इसे ट्रस्ट मानने से इनकार किया और कहा कि यह एक तरह से परिवार है। हर चीज पूरी योजना के साथ बनाई गई है। सरकारी पैसे का उपयोग समाज सेवा के नाम पर किया गया। ट्रस्ट ने यह दिखाया कि वे सामाजिक काम करना चाहते हैं। लेकिन जांच में सामने आया कि इस यूनिवर्सिटी का इस्तेमाल सिर्फ और सिर्फ राजनीति के लिए किया गया।
दरअसल आकाश सक्सेना ने यह भी बताया कि इस यूनिवर्सिटी में आज तक किसी भी तरह का कोई सामाजिक काम नहीं किया गया। यह काम सरकारी नियमों के अनुसार भी नहीं हुआ। जौहर यूनिवर्सिटी 560 एकड़ में फैली है। इसमें 350 एकड़ से ज्यादा सरकारी जमीन है। इसे कोर्ट में साबित किया जा चुका है। पिछले साल इनकम टैक्स ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि यूनिवर्सिटी की सभी इमारतें सरकारी पैसे से बनी हैं।






