हाथरस में आज एक चुनावी कार्यक्रम के दौरान उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव को अयोध्या के मुद्दे पर करारा प्रहार करते हुए आइना दिखाया। योगी ने अखिलेश के उस बयान पर सीधा हमला बोला, जिसमें सपा प्रमुख ने अयोध्या को “अनुपम-अनुकरणीय धार्मिक नगरी” के रूप में विकसित करने का संकल्प लिया था। मुख्यमंत्री ने बिना किसी लाग-लपेट के कहा कि अखिलेश अपना इतिहास देखें, उनके लोगों ने तो रामभक्तों पर गोलियां चलवाई थीं। योगी ने इस बात पर जोर दिया कि समाजवादी पार्टी ने हमेशा हिंदू आस्था से जुड़ी धार्मिक परंपराओं और विकास कार्यों का विरोध किया है। उन्होंने अखिलेश को पश्चाताप करने और एक बार रामलला के दर्शन करने की सलाह दी, जिससे सद्बुद्धि आने का दावा किया।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में सपा प्रमुख अखिलेश यादव पर कटाक्ष करते हुए कहा, “आज जब रामभक्तों के परिश्रम और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में अयोध्या त्रेता युग का स्मरण करा रही है, तो आपके मुंह में भी पानी आने लग गया है।” योगी ने समाजवादी पार्टी के शासनकाल की याद दिलाते हुए आरोप लगाया कि उन्होंने थानों और जेलों में भी कृष्ण जन्माष्टमी जैसे पवित्र त्योहारों को रोक दिया था। इतना ही नहीं, कांवड़ यात्रा पर भी प्रतिबंध लगाने का प्रयास किया गया था। मुख्यमंत्री ने हाथरस के जनप्रतिनिधियों का हवाला देते हुए बताया कि कैसे उनकी सरकार में 22 से अधिक मंदिरों का सुंदरीकरण किया गया, जो समाजवादी पार्टी के समय में असंभव था। उन्होंने तीखे लहजे में कहा कि उस समय यह पैसा कब्रिस्तान की बाउंड्री वॉल बनाने में खर्च होता था, जबकि उनकी सरकार ने उसी पैसे को मंदिरों के जीर्णोद्धार और सौंदर्यीकरण के लिए इस्तेमाल किया है, जो उनकी विकास की प्राथमिकताओं में स्पष्ट अंतर को दर्शाता है।
सीएम योगी ने अखिलेश यादव को रामलला के दर्शन करने की दी सलाह
योगी आदित्यनाथ ने अखिलेश यादव को चुनौती देते हुए कहा, “अखिलेश जी, अयोध्या को रामभक्तों ने संवार और सजा दिया है, आप उसकी चिंता मत कीजिए।” उन्होंने एक बार फिर अखिलेश को पश्चाताप करने और रामलला के दर्शन करने की सलाह दी, ताकि उन्हें सद्बुद्धि मिल सके। मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि अब समाजवादी पार्टी को कृष्ण कन्हैया के लिए भी कुछ करने की तैयारी करनी चाहिए। उन्होंने अखिलेश को मथुरा-वृंदावन और श्री कृष्ण की जन्मभूमि के बारे में खुलकर बोलने की चुनौती दी, यदि वे सच में खुद को धार्मिक कहते हैं। योगी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अखिलेश में हिम्मत नहीं है, क्योंकि उनके पास मुल्ला और मौलवियों के सामने घुटने टेकने के सिवाय प्रदेश के विकास के लिए कोई एजेंडा नहीं है। उन्होंने सपा प्रमुख को विकास कार्यों पर धूल डालने का काम न करने की चेतावनी दी और साफ किया कि अयोध्या अपनी पहचान के लिए उन पर मोहताज नहीं है, बल्कि वह स्वयं अपने गौरवशाली इतिहास और वर्तमान की बदौलत विश्व पटल पर स्थापित हो चुकी है।
अखिलेश यादव ने अयोध्या को लेकर क्या दिया था बयान?
गौरतलब है कि मुख्यमंत्री योगी के इस प्रहार से पहले सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के जरिए अपना संकल्प व्यक्त किया था। अखिलेश ने कहा था, “हम धर्मनिष्ठता और सत्यनिष्ठता के साथ ये संकल्प लेते हैं कि नई सरकार बनाकर ‘अयोध्या’ को एक ऐसी अनुपम-अनुकरणीय धार्मिक नगरी के रूप में विकसित करेंगे, जहां विश्व भर से आए श्रद्धालु सच्ची आध्यात्मिकता की अद्वितीय अनुभूति करेंगे।” उन्होंने आगे लिखा था कि प्रभु के आशीर्वाद के साथ, वे अयोध्या के सनातन मान को आस्था-श्रद्धा, अखंड विश्वास और सच्ची भावना के ‘सियाराम-धाम’ के रूप में पुनर्स्थापित और पल्लवित करेंगे, जिससे अयोध्यावासियों के भी परंपरागत गौरवभान और अधिकारों को पुन: स्थापित किया जाएगा। इसी बयान के जवाब में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अखिलेश यादव के इतिहास और वर्तमान की तुलना करते हुए उन पर तीखा हमला बोला।
अखिलेश जी,
आप अयोध्या की चिंता मत करिए, पश्चाताप करिए। एक बार प्रभु श्री रामलला का दर्शन कर लीजिए। कम से कम इसी से सद्बुद्धि आएगी…
आइए, खुलकर बोलिए कि श्री राम जन्मभूमि मुक्ति के आंदोलन की तर्ज पर ही श्रीकृष्ण जन्मभूमि की मुक्ति का भी अभियान चलना चाहिए… pic.twitter.com/eoZEY6ze2P
— Yogi Adityanath (@myogiadityanath) June 28, 2026






