लखनऊ: कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी की नागरिकता को लेकर चल रहा पुराना विवाद एक बार फिर सुर्खियों में है। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने इस हाई-प्रोफाइल मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए केंद्र सरकार की भूमिका को अहम माना है। गुरुवार को हुई सुनवाई के दौरान जस्टिस राजीव सिंह की एकल पीठ ने केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) को इस केस में पक्षकार बनाने का आदेश दिया है।
मामले की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एसबी पांडे और गृह सचिव विवेक मिश्रा खुद अदालत में मौजूद थे। इस दौरान गृह मंत्रालय ने राहुल गांधी की नागरिकता से जुड़े कुछ अहम दस्तावेज एक बंद लिफाफे में कोर्ट को सौंपे।
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कोर्ट ने क्यों बनाया गृह मंत्रालय को पक्षकार?
इन गोपनीय दस्तावेजों को देखने के बाद अदालत ने यह महसूस किया कि मामले की सच्चाई तक पहुंचने के लिए भारत सरकार का पक्ष जानना जरूरी है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि गृह मंत्रालय को पक्षकार इसलिए बनाया जा रहा है ताकि राहुल गांधी की नागरिकता से संबंधित सभी आधिकारिक रिकॉर्ड अदालत के समक्ष रखे जा सकें। अब केंद्र सरकार को इस पूरे मामले पर 6 अप्रैल तक एक विस्तृत हलफनामा दाखिल करना होगा।
क्या हैं राहुल गांधी पर लगे आरोप?
यह पूरा मामला कर्नाटक के एक बीजेपी कार्यकर्ता एस. विग्नेश शिशिर की याचिका पर आधारित है। शिशिर ने अपनी याचिका में दावा किया है कि राहुल गांधी के पास भारत के साथ-साथ ब्रिटेन की भी नागरिकता है, जो कि भारतीय कानून के तहत एक अपराध है।
याचिकाकर्ता ने मांग की है कि राहुल गांधी के खिलाफ न केवल FIR दर्ज की जाए, बल्कि उन पर पासपोर्ट एक्ट और सरकारी गोपनीयता कानून (Official Secrets Act) जैसी गंभीर धाराओं के तहत मुकदमा चलाया जाए। यह मामला पहले रायबरेली की एक अदालत में चल रहा था, जिसे पिछले साल हाईकोर्ट के आदेश पर लखनऊ की सांसद-विधायक कोर्ट में ट्रांसफर किया गया था।
अब 6 अप्रैल पर टिकी हैं सबकी नजरें
हाईकोर्ट के इस नए आदेश के बाद अब गेंद पूरी तरह से केंद्र सरकार के पाले में है। 6 अप्रैल को होने वाली अगली सुनवाई बेहद महत्वपूर्ण होगी, क्योंकि उसी दिन केंद्र सरकार अपने हलफनामे के जरिए बताएगी कि उसके रिकॉर्ड में राहुल गांधी की नागरिकता की स्थिति क्या है। इस हलफनामे के बाद ही यह तय होगा कि राहुल गांधी की मुश्किलें बढ़ेंगी या फिर उन पर लगे आरोप निराधार साबित होंगे। फिलहाल, इस मामले ने सियासी गलियारों में एक नई हलचल पैदा कर दी है।