समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव ने देश में गहराते एलपीजी संकट के लिए सीधे तौर पर केंद्र सरकार की ईरान नीति को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने कहा कि दशकों से भारत का मित्र रहे ईरान के प्रति मौजूदा सरकार के रवैये की वजह से ही आज देश के लोग गैस सिलेंडर की कमी और बढ़ती कीमतों से जूझ रहे हैं। यह बयान ऐसे समय आया है, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मध्य-पूर्व में जारी युद्ध संकट पर चर्चा के लिए सर्वदलीय बैठक बुलाई है।
डिंपल यादव ने मीडिया से बात करते हुए स्पष्ट किया कि सरकार का ईरान के प्रति जो रवैया रहा, उसका परिणाम आज पूरे देश को भुगतना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि ईरान भारत के लिए हमेशा से एक विश्वसनीय ऊर्जा आपूर्तिकर्ता रहा है, विशेषकर कच्चे तेल और एलपीजी के संदर्भ में। उसके साथ संबंधों में आई खटास ने देश की एलपीजी आपूर्ति श्रृंखला को गंभीर रूप से बाधित किया है। मिडिल ईस्ट में तनाव के बीच भारत की विदेश नीति की दिशा पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि आज की बैठक में हम सरकार से पूछेंगे कि इस गंभीर संकट को लेकर उनकी क्या तैयारी है और वे एलपीजी की कमी दूर करने के लिए क्या ठोस कदम उठा रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि सिर्फ बैठकें बुलाने से समस्या हल नहीं होगी, सरकार को अपनी नीतियों पर पुनर्विचार करना होगा।
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सांसद यादव ने एलपीजी संकट से आम जनता को हो रही परेशानियों पर भी विस्तार से बात की। उन्होंने कहा कि आज घर-घर में गैस की समस्या है। लोगों को समय पर गैस सिलेंडर नहीं मिल पा रहे हैं, जिससे उनकी दैनिक जीवनशैली पर सीधा असर पड़ रहा है। कई उपभोक्ताओं को तो महीने भर पहले की बुकिंग के बाद भी गैस नहीं मिल रही है, जिससे रसोईघरों में कामकाज ठप पड़ गया है। गृहिणियों को खाना बनाने के लिए लकड़ी या चूल्हे जैसे पारंपरिक और स्वास्थ्य के लिए हानिकारक ईंधन का सहारा लेना पड़ रहा है। यह स्थिति विशेष रूप से ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में गंभीर है, जहां एलपीजी ही मुख्य ईंधन स्रोत है और अन्य विकल्पों की उपलब्धता कम है। इस संकट से महंगाई भी बढ़ रही है, क्योंकि लोग खुले बाजार से अधिक कीमत पर गैस खरीदने को मजबूर हैं।
महिला आरक्षण पर विपक्षी दलों की स्पष्ट मांग
एलपीजी संकट के साथ ही, डिंपल यादव ने महिला आरक्षण विधेयक के मुद्दे पर भी सरकार से स्पष्टता की मांग की। उन्होंने कहा कि इस विषय पर सभी विपक्षी दलों की राय एक जैसी है। हम सभी ने सरकार से यह स्पष्ट करने की मांग की है कि वह महिला आरक्षण बिल किस तरह से लाना चाहती है। उन्होंने विशेष रूप से सवाल उठाया कि क्या इस बिल में अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST), अल्पसंख्यक महिलाओं और अति पिछड़ा वर्ग की महिलाओं के लिए भी आरक्षण का प्रावधान है? उन्होंने कहा कि सरकार को इन वर्गों की महिलाओं के प्रतिनिधित्व को सुनिश्चित करने के लिए अपना पक्ष विपक्ष के सामने साफ करना चाहिए। यह केवल महिला आरक्षण नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय का भी मुद्दा है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। विपक्षी दल इस मुद्दे पर सरकार से ठोस जवाब की उम्मीद कर रहे हैं ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि आरक्षण का लाभ समाज के हर तबके तक पहुंचे।
आज संसद भवन में एक महत्वपूर्ण सर्वदलीय बैठक
वहीं, मध्य-पूर्व में चल रहे युद्ध संकट को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज संसद भवन में एक महत्वपूर्ण सर्वदलीय बैठक बुलाई है। इस बैठक में सभी प्रमुख राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों को मौजूदा वैश्विक स्थिति और भारत सरकार की तैयारियों के बारे में विस्तृत जानकारी दी जाएगी। सरकार का मुख्य उद्देश्य इस बैठक के जरिए देश में राजनीतिक एकता का प्रदर्शन करना है, ताकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह संदेश जाए कि संकट के इस दौर में पूरा भारत एक साथ खड़ा है। यह पहल वैश्विक मंच पर भारत की स्थिति को मजबूत करने और किसी भी संभावित चुनौती से निपटने के लिए राष्ट्रीय आम सहमति बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस बैठक में विदेश मंत्री और रक्षा मंत्री भी मौजूद रह सकते हैं, जो स्थिति पर विस्तृत अपडेट देंगे।
विश्लेषकों का मानना है कि मध्य-पूर्व में बढ़ता तनाव और वैश्विक भू-राजनीतिक अस्थिरता भारत जैसे बड़े तेल आयातक देशों के लिए गंभीर चुनौतियां पेश कर रही है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा आयात करता है, और ईरान जैसे देश पारंपरिक रूप से महत्वपूर्ण आपूर्तिकर्ता रहे हैं। ऐसे में ईरान के साथ संबंधों में किसी भी तरह की गिरावट का असर भारत की ऊर्जा सुरक्षा और घरेलू बाजार पर पड़ना स्वाभाविक है। डिंपल यादव का बयान इसी पृष्ठभूमि में आया है, जो सीधे तौर पर विदेश नीति को घरेलू आर्थिक समस्याओं से जोड़ रहा है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि विदेश नीति का निर्धारण करते समय देश के नागरिकों के हितों को सर्वोपरि रखना चाहिए। यह देखना होगा कि सर्वदलीय बैठक में सरकार इन आरोपों पर क्या सफाई देती है और भविष्य के लिए क्या रणनीति पेश करती है।
यह सर्वदलीय बैठक न केवल मध्य-पूर्व संकट पर चर्चा का मंच होगी, बल्कि विपक्षी दलों को सरकार से घरेलू मुद्दों पर सवाल पूछने का अवसर भी देगी। एलपीजी संकट और महिला आरक्षण जैसे मुद्दे, जिन पर डिंपल यादव ने बात की है, निश्चित रूप से बैठक के दौरान उठाए जाएंगे। सरकार पर इन मुद्दों पर संतोषजनक जवाब देने का दबाव रहेगा। विपक्षी दल उम्मीद कर रहे हैं कि सरकार न केवल मध्य-पूर्व की स्थिति पर स्पष्टता देगी, बल्कि घरेलू स्तर पर उत्पन्न हुई समस्याओं, जैसे एलपीजी संकट, पर भी ठोस समाधान पेश करेगी। इस बैठक के माध्यम से यह भी स्पष्ट होगा कि सरकार अंतरराष्ट्रीय और घरेलू चुनौतियों से निपटने के लिए किस हद तक विपक्षी दलों को विश्वास में लेने को तैयार है और क्या किसी राष्ट्रीय कार्ययोजना पर सहमति बन पाती है।