देशभर में शिक्षा संस्थानों, खासकर कोचिंग सेंटरों में आग लगने की घटनाएं अब एक भयावह सिलसिला बनती जा रही हैं। इस सिलसिले की ताजा कड़ी लखनऊ के अलीगंज से सामने आई है, जहां एक बहुमंजिला इमारत में संचालित कोचिंग सेंटर में भीषण अग्निकांड ने सुरक्षा इंतजामों की एक बार फिर धज्जियां उड़ा दीं। यह घटना एक बार फिर उन गंभीर सवालों को जन्म देती है कि क्या ऐसे संस्थानों में आग बुझाने के पर्याप्त इंतजाम थे, और यदि नहीं, तो इन्हें संचालन की अनुमति कैसे मिल गई?
बता दें कि जब आग लगी, तो देखते ही देखते धुएं का गुबार आसमान में छा गया और आग ने कुछ ही देर में विकराल रूप ले लिया। सेंटर से धुएं और आग की लपटें उठती देख आसपास के लोगों में दहशत फैल गई। उन्होंने तत्काल दमकल विभाग को सूचना दी, लेकिन तब तक स्थिति काफी बिगड़ चुकी थी। आग इतनी भीषण थी कि इमारत के भीतर मौजूद छात्र जान बचाने के लिए खिड़कियों से कूदने को मजबूर हो गए। यह मंजर दिल दहला देने वाला था, जहां युवा छात्र अपनी जान बचाने के लिए ऊंची इमारत से छलांग लगा रहे थे।
कई छात्र गंभीर रूप से घायल
ऊंचाई से कूदने के कारण कई छात्र गंभीर रूप से घायल हो गए, जिनमें से कुछ की हालत नाजुक बताई जा रही है। चारों ओर चीख-पुकार और अफरा-तफरी का माहौल था। मौके पर मौजूद लोगों ने तुरंत घायलों को अस्पताल पहुंचाने की कोशिश की। इस भीषण अग्निकांड की भयावहता को और बढ़ाती यह आशंका है कि इमारत के भीतर अभी भी कुछ छात्रों के फंसे होने की खबर है, जिन्हें बाहर निकालने के प्रयास जारी हैं।
भीषण आग पर काबू पाने के लिए दमकल विभाग की जंग जारी
सूचना मिलते ही दमकल की कई गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और आग पर काबू पाने की कोशिशें शुरू हुईं। लेकिन आग की लपटें इतनी तेज थीं और धुआं इतना घना था कि दमकलकर्मियों को भी काफी मशक्कत करनी पड़ी। मौके पर मौजूद दमकलकर्मी लगातार आग बुझाने और फंसे हुए लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने का प्रयास कर रहे हैं। आग अभी भी पूरी तरह से बुझाई नहीं जा सकी है और दहक रही है, जिससे बचाव कार्यों में बाधा आ रही है।
सीएम योगी ने अधिकारियों को दिए निर्देश
इस भीषण घटना की गंभीरता को समझते हुए, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने तत्काल इसका संज्ञान लिया। मुख्यमंत्री ने बिना किसी देरी के अधिकारियों को मौके पर पहुंचने के निर्देश दिए। उन्होंने यह भी आदेश दिया कि राहत और बचाव कार्यों में तेज़ी लाई जाए ताकि एक भी जान जोखिम में न रहे और सभी फंसे हुए लोगों को सुरक्षित निकाला जा सके।
मुख्यमंत्री कार्यालय के अनुसार, घायलों को समुचित और बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए भी मुख्यमंत्री ने विशेष निर्देश जारी किए। प्रशासन को हर स्तर पर सतर्कता बरतने और राहत कार्यों की सतत निगरानी सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है। मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि इस पूरी घटना पर लगातार नज़र रखी जाए और घायलों के सही इलाज में किसी भी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
यह घटना सिर्फ एक इमारत में लगी आग नहीं है, बल्कि यह देशभर में शिक्षा के नाम पर चल रहे असुरक्षित ठिकानों की सच्चाई है। सवाल यह है कि क्या ऐसे संस्थानों को चलाने की अनुमति देने से पहले सुरक्षा मानकों की गहन जांच नहीं होनी चाहिए? क्या अभिभावक अपने बच्चों को ऐसी मौत की इमारतों में पढ़ने के लिए भेज रहे हैं, जहां आग बुझाने के न्यूनतम इंतजाम भी नहीं दिखते? यह अग्निकांड एक बार फिर शासन-प्रशासन की नींद तोड़ने और कड़े कदम उठाने की मांग करता है ताकि भविष्य में ऐसी भयावह त्रासदियों को रोका जा सके और छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।






