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UGC के नये नियमों के समर्थन में आईं मायावती, सामान्य वर्ग के विरोध को बताया अनुचित, पिछड़े वर्ग के लोगों से की ये अपील

Written by:Atul Saxena
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मायावती ने दलितों और पिछड़ों से अपील की कि उन्हें स्वार्थी व बिकाऊ नेताओं के भड़काऊ बयानों के बहकावे में भी क़तई नहीं आना चाहिये, जिनकी आड़ में ये लोग आए दिन घिनौनी राजनीति करते रहते हैं इन वर्गों के लोग ज़रूर सावधान रहें।
UGC के नये नियमों के समर्थन में आईं मायावती, सामान्य वर्ग के विरोध को बताया अनुचित, पिछड़े वर्ग के लोगों से की ये अपील

Mayawati supports UGC rules

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नए नियमों क्र विरोध में पूरे देश में विरोध हो रहा है, यूजीसी मुख्यालय पर प्रदर्शन से लेकर कई राज्यों में सवर्ण समाज के लोग, संगठन सड़कों पर हैं और इन नियमों को वापस लेने की मांग कर रहे हैं लेकिन उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री और बहुजन समाज पार्टी प्रमुख मायावाती इसके समर्थन में आ गई है

मायावती ने सोशल मीडिया X पर आज बुधवार को पोस्ट कर यूजीसी के नए नियमों का खुलकर समर्थन किया है, उन्होंने सामान्य वर्ग के लोगों द्वारा किये जा रहे विरोध को ख़ारिज कर दिया और उसे अनुचित बताया, मायावाती ने दलित और पिछड़े वर्ग के लोगों से विरोध करने वालों के बहकावे में नहीं आने की अपील भी की है

मायावती ने सोशल मीडिया पर लिखी ये पोस्ट 

  • देश की उच्च शिक्षण संस्थानों में जातिवादी भेदभाव के निराकरण/समाधान हेतु विश्वविद्यालय अनुदान आयोग, द्वारा सरकारी कॉलेज एवं निजी यूनिवर्सिटियों में भी ’इक्विटी कमेटी’ (समता समिति) बनाने के नये नियम के कुछ प्रावधानों को सामान्य वर्ग के केवल जातिवादी मानसिकता के ही लोगों द्वारा इसे अपने विरुद्ध भेदभाव व षडयंत्रकारी मानकर इसका जो विरोध किया जा रहा है, तो यह कतई भी उचित नहीं है।
  • जबकि पार्टी का यह भी मानना है कि इस प्रकार के नियमों को लागू करने के पहले अगर सभी को विश्वास में ले लिया जाता तो यह बेहतर होता और देश में फिर सामाजिक तनाव का कारण भी नहीं बनता। इस ओर भी सरकारों व सभी संस्थानों को ज़रूर ध्यान देना चाहिये।
  •  साथ ही, ऐसे मामलों में दलितों व पिछड़ों को भी, इन वर्गों के स्वार्थी व बिकाऊ नेताओं के भड़काऊ बयानों के बहकावे में भी क़तई नहीं आना चाहिये, जिनकी आड़ में ये लोग आए दिन घिनौनी राजनीति करते रहते हैं अर्थात् इन वर्गों के लोग ज़रूर सावधान रहें, यह भी अपील।

UGC के नए नियमों को सुप्रीम कोर्ट में दी गई है चुनौती 

गौरतलब है कि यूजीसी द्वारा 13 जनवरी को लागू किये गए “प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशंस रेगुलेशंस, 2026” को लेकर विवाद खड़ा हो गया है,  देश के कई राज्‍यों में इसे लेकर विरोध प्रदर्शन हो रहा है। इसे लेकर एडवोकेट विनीत जिंदल ने इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। जनहित याचिका में एडवोकेट जिंदल ने है कि जाति-आधारित भेदभाव केवल आरक्षित वर्गों तक सीमित नहीं है, बल्कि सामान्य वर्ग (जनरल कैटेगरी) के किसी भी व्यक्ति के साथ भी हो सकता है। याचिका में नियम 3(सी) में संशोधन करने अथवा उसे निरस्त करने की मांग की गई है, ताकि कानून के समक्ष समानता सुनिश्चित की जा सके।

नियमों में सामान्य वर्ग के छात्रों के साथ भेदभाव का आरोप 

याचिकाकर्ता ने यह भी मांग की है कि जाति-भेदभाव के नाम पर झूठी और दुर्भावनापूर्ण शिकायतें दर्ज करने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध उचित कार्रवाई का प्रावधान किया जाए। न्याय जाति-निरपेक्ष होना चाहिए। याचिका में कहा गया है कि यूजीसी के नियम एससी, एसटी और ओबीसी के अलावा बाकी वर्गों के लोगों को शिकायत दर्ज करने और संस्थागत सुरक्षा का अधिकार नहीं देते।याचिका में तर्क दिया गया है कि कोई भी भेदभाव संविधान के अनुच्छेद 14,15 और 21 के तहत दिए गए मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है।

धर्मेंद्र प्रधान का आश्वासन, नहीं होने देंगे किसी का उत्पीड़न

हालाँकि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा है कि वह सभी को आश्वस्त करते हैं कि किसी के साथ भेदभाव नहीं होगा और कोई भी इस कानून का गलत इस्तेमाल नहीं कर सकेगा। उन्होंने बताया कि यह पूरी व्यवस्था सुप्रीम कोर्ट की देखरेख में आई है और संविधान की परिधि के भीतर ही लागू की जा रही है। धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि चाहे यूजीसी हो, केंद्र सरकार हो या राज्य सरकार, सभी के दायित्व स्पष्ट हैं। उन्होंने दोहराया कि सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि किसी वर्ग, समुदाय या व्यक्ति के साथ अन्याय न हो और नियमों का उद्देश्य उच्च शिक्षा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, न्यायसंगत और जवाबदेह बनाना है।