मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में 06 जनवरी 2026 (मंगलवार) को लखनऊ के लोकभवन में कैबिनेट की बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में स्टांप एवं रजिस्ट्रेशन, उद्योग, परिवहन सहित कई विभागों के 14 अहम प्रस्ताव रखे गए थे। इनमें से 13 प्रस्तावों को स्वीकृति दी गई। कैबिनेट मंत्री सुरेश खन्ना, रविंद्र जायसवाल, योगेंद्र उपाध्याय और नंद गोपाल नंदी ने मीडिया को बैठक में लिए गए फैसलों की जानकारी दी।
कैबिनेट बैठक के फैसलों में जहां एक ओर पारिवारिक संपत्ति दान पर स्टाम्प शुल्क में बड़ी राहत दी गई है, वहीं दूसरी ओर औद्योगिक निवेश और रोजगार को बढ़ावा देने वाली ग्लोबल कैपेसिटी सेंटर नीति की एसओपी को भी स्वीकृति दी गई है।
योगी कैबिनेट के अहम फैसले
- अब आवासीय और कृषि की तरह औद्योगिक और व्यवसायिक संपत्तियों को अपनों के नाम ट्रांसफर करने पर 5,000 रुपए स्टांप ड्यूटी लगेगी।
- उद्योग विभाग ने ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC) को लेकर गाइडलाइन तैयार की है। इसकी नियमावली पर भी मुहर लग गई है। मंत्री नंद गोपाल नंदी ने बताया- गाइडलाइन के तहत 21 कंपनियों ने काम शुरू कर दिया है, जिससे 10 हजार से अधिक नौकरियां मिलेंगी।
- सेमीकंडक्टर पॉलिसी 2024 के तहत यूपी में सेमीकंडक्टर निर्माण के क्षेत्र में तीन हजार करोड़ रुपए का निवेश करने वाले उद्यमियों को सब्सिडी दी जाएगी।
- वाराणसी के मंडलीय चिकित्सालय के 11 भवनों का ध्वस्तीकरण किया जाएगा। वहां 500 बेड का सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल बनाया जाएगा, जो चार साल में बनकर तैयार होगा।
- वाराणसी में नेशनल फोरेंसिक साइंस यूनिवर्सिटी के लिए 50 एकड़ जमीन दी जाएगी।
- IIMT विश्वविद्यालय मेरठ को नोएडा में कैंपस खोलने की अनुमति मिल गई है।
- पीलीभीत में बस स्टैंड बनाया जाएगा। इसके लिए राजस्व विभाग की 7,000 वर्ग मीटर जमीन परिवहन विभाग को 30 साल के लिए लीज पर दी जाएगी।
- क्षेत्रीय क्रीड़ा अधिकारी के 18 पद हैं। इनमें से 12 पद प्रमोशन से भरे जाएंगे और 6 पद अंतरराष्ट्रीय पदक विजेता खिलाड़ियों से भरे जाएंगे।
- पीएसी 37वीं वाहिनी कानपुर के जर्जर भवनों का ध्वस्तीकरण किया जाएगा। इस जमीन पर 108 टाइप-वन आवासों का निर्माण किया जाएगा।
- झांसी और कुशीनगर में उप-निबंधक कार्यालय के लिए जमीन दी जाएगी।
इसके अलावा योगेंद्र उपाध्याय ने बताया कि जेएस विश्वविद्यालय शिकोहाबाद कॉलेज की स्थापना 2011 में हुई थी। कुलपति सुकेश यादव और कुलसचिव वंदन मिश्र की गिरफ्तारी हुई क्योंकि इस विश्वविद्यालय से फर्जी मार्कशीट जारी हुई थी। इसके बाद उच्च शिक्षा परिषद के अवर सचिव जांच करने गए तो उन्हें अपेक्षित सहयोग नहीं दिया गया। धारा 55(3) से डीएम से जांच करने को कहा गया। ईओडब्ल्यू से जांच करवाई गई। सभी जांचों के बाद विश्वविद्यालय की मान्यता समाप्त कर परिसमापन की प्रक्रिया पूरी कर दी गई।
उन्होंने बताया कि यह निजी विश्वविद्यालय था। राजस्थान में फर्जी मार्कशीट पाई गई थीं। बिना कृषि की मान्यता के कोर्स चल रहा था। मेरठ आईआईएमटी विश्वविद्यालय ने ऑफ कैंपस विश्वविद्यालय खोलने का प्रस्ताव दिया गया था। अब संचालन प्राधिकार पत्र दिया गया है। मेरठ में विश्वविद्यालय है और इसका ऑफ कैंपस नोएडा में होगा।
#LIVE: कैबिनेट बैठक के पश्चात कैबिनेट निर्णयों की जानकारी हेतु प्रेस वार्ता का आयोजन । https://t.co/2yCh07TqBg
— Information and Public Relations Department, UP (@InfoDeptUP) January 6, 2026





