उत्तर प्रदेश पुलिस विभाग में लंबे इंतजार के बाद आखिरकार वह घड़ी आ ही गई, जिसका सबको बेसब्री से इंतजार था। करीब चार साल बाद यूपी पुलिस को अपना स्थायी मुखिया मिल गया है और राजीव कृष्ण ने अब पूर्णकालिक डीजीपी का पदभार संभाल लिया है। इस संबंध में आधिकारिक आदेश भी जारी कर दिए गए हैं, जिससे विभाग में खुशी की लहर दौड़ गई है। यह एक बड़ी राहत की बात है, क्योंकि यूपी में लंबे समय से कोई स्थायी डीजीपी नहीं था।
बता दें कि राजीव कृष्ण 1 जून 2025 से ही यूपी के कार्यवाहक डीजीपी के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे थे। अब उन्हें स्थायी तौर पर यह अहम जिम्मेदारी सौंपी गई है। इस पद के लिए चयन प्रक्रिया काफी गहन थी। संघ लोक सेवा आयोग ने तीन वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों के नाम का एक पैनल प्रदेश सरकार को भेजा था, जिसमें 1990 बैच की आईपीएस अधिकारी रेणुका मिश्रा, 1991 बैच के आईपीएस अधिकारी पीयूष आनंद और स्वयं राजीव कृष्ण का नाम शामिल था। सरकार ने अंततः 1991 बैच के अनुभवी आईपीएस अधिकारी राजीव कृष्ण पर भरोसा जताया।
कौन हैं राजीव कृष्ण?
आखिर कौन हैं राजीव कृष्ण, जिन्हें उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य की पुलिस का मुखिया बनाया गया है? यूपी पुलिस विभाग की आधिकारिक वेबसाइट से मिली जानकारी के मुताबिक, राजीव कृष्ण का जन्म 26 जून 1969 को हुआ था। उनका गृह स्थान उत्तर प्रदेश का ही गौतम बुद्ध नगर है, जो उनकी प्रदेश से गहरी जड़ों को दर्शाता है। उनके पिता का नाम एच के मित्तल है। वे 1991 बैच के एक बेहद कुशल और अनुभवी आईपीएस अधिकारी हैं।
पुलिस विभाग में उनकी कार्यकुशलता और समर्पण की चर्चा हमेशा से रही है, जिसके बलबूते उन्होंने लगातार तरक्की की सीढ़ियां चढ़ीं। अपने शानदार सेवाकाल के दौरान उन्होंने विभिन्न पदों पर रहते हुए बेहतरीन काम किया और अब वे प्रदेश में पुलिस विभाग के सर्वोच्च पद पर पहुंच गए हैं। उनकी सेवाओं को कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों से नवाजा जा चुका है, जिसमें पुलिस मेडल और पुलिस मेडल फॉर मेधावी सेवा शामिल हैं। इतना ही नहीं, उन्हें उत्कृष्ट सेवा के लिए राष्ट्रपति पुलिस पदक से भी सम्मानित किया जा चुका है, जो उनकी असाधारण सेवाओं का प्रमाण है।
2022 के बाद पहली बार मिला यूपी को स्थायी डीजीपी
यह भी गौर करने वाली बात है कि उत्तर प्रदेश में साल 2022 के बाद से कोई भी स्थायी रूप से डीजीपी नहीं था। इस दौरान विभाग में जितने भी अधिकारी डीजीपी पद पर रहे, वे सभी कार्यवाहक के तौर पर ही काम कर रहे थे, जिससे विभाग को कहीं न कहीं स्थायी नेतृत्व की कमी महसूस हो रही थी। राजीव कृष्ण ने भी कार्यवाहक डीजीपी के रूप में 1 जून 2025 से ही पदभार संभाला था, लेकिन अब वे स्थायी डीजीपी के रूप में अपनी महत्वपूर्ण सेवाएं जारी रखेंगे, जिससे विभाग को स्थिरता और दीर्घकालिक योजना बनाने का अवसर मिलेगा।
दरअसल, सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुसार, किसी भी राज्य के स्थायी डीजीपी को कम से कम दो साल का न्यूनतम कार्यकाल मिलना अनिवार्य होता है। ऐसे में, यह संभावना जताई जा रही है कि राजीव कृष्ण अब उत्तर प्रदेश में एक लंबी पारी खेल सकते हैं और अपनी रणनीतियों को प्रभावी ढंग से लागू कर सकते हैं। यह नियुक्ति न केवल राजीव कृष्ण के लिए एक बड़ी उपलब्धि है, बल्कि उत्तर प्रदेश पुलिस विभाग के लिए भी एक नए अध्याय की शुरुआत है, जिसमें स्थायी नेतृत्व के साथ बेहतर कानून-व्यवस्था की उम्मीद की जा रही है।






