अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे को लेकर चल रहा विवाद थमता नजर नहीं आ रहा है। वहीं अब गाजीपुर से समाजवादी पार्टी सांसद अफजाल अंसारी ने इस मामले में विशेष जांच दल (SIT) की जांच पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले की जांच धार्मिक जगत के सर्वोच्च पदों पर बैठे चारों शंकराचार्यों से कराई जानी चाहिए। उनके बयान के बाद यह मामला फिर राजनीतिक और धार्मिक चर्चा के केंद्र में आ गया है।
दरअसल अफजाल अंसारी ने कहा कि सनातन परंपरा में चार पीठों के शंकराचार्यों को सर्वोच्च स्थान प्राप्त है। ऐसे में यदि राम मंदिर के चढ़ावे को लेकर किसी तरह की कथित धांधली या अनियमितता के आरोप लगे हैं तो उसकी निष्पक्ष जांच उन्हीं के माध्यम से होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जांच रिपोर्ट आने के बाद जो भी दोषी पाया जाए, उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए।
राम मंदिर चढ़ावा विवाद में SIT जांच पर उठे सवाल
वहीं उत्तर प्रदेश सरकार ने राम मंदिर में कथित चंदा चोरी और गबन के आरोपों की जांच के लिए लखनऊ मंडल के कमिश्नर विजय विश्वास पंत की अध्यक्षता में एक विशेष जांच दल का गठन किया था। 13 जून को गठित इस टीम ने अयोध्या पहुंचकर मंदिर प्रबंधन से जुड़े अधिकारियों, कर्मचारियों और बैंक कर्मचारियों के बयान दर्ज किए। जांच पूरी होने के बाद रिपोर्ट शासन को सौंप दी गई है।
इसी जांच प्रक्रिया को लेकर अफजाल अंसारी ने अपनी आपत्ति दर्ज कराई है। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने मंदिर में मुकुट और अन्य कीमती वस्तुएं दान की हैं, उन्हें किसी प्रकार की रसीद नहीं मिली। उन्होंने इस मुद्दे को भी जांच का हिस्सा बनाने की बात कही। वहीं विपक्षी दलों ने बिना एफआईआर दर्ज किए जांच कराने के तरीके पर भी सवाल उठाए हैं। दूसरी तरफ मंदिर प्रबंधन पहले ही आरोपों को खारिज कर चुका है। फिलहाल सरकार की ओर से गठित SIT अपनी रिपोर्ट जमा कर चुकी है और आगे की कार्रवाई का इंतजार किया जा रहा है।
अखिलेश यादव के आरोपों के बाद बढ़ा विवाद
राम मंदिर चढ़ावा विवाद उस समय चर्चा में आया जब 7 जून को समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने मंदिर में चढ़ावे को लेकर कथित चोरी और गबन के आरोप लगाए थे। उनके बयान के बाद यह मामला तेजी से राजनीतिक मुद्दा बन गया। इसके बाद प्रदेश की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया। समाजवादी पार्टी लगातार इस मामले को उठाती रही है और मंदिर प्रबंधन से जुड़े सवालों पर जवाब मांग रही है। वहीं भारतीय जनता पार्टी इन आरोपों को खारिज करते हुए इसे विपक्ष का राजनीतिक हमला बता रही है। इसी बीच अफजाल अंसारी के बयान ने विवाद को नया मोड़ दे दिया है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि धार्मिक और सामाजिक विश्वास बनाए रखने के लिए जांच ऐसे लोगों के हाथ में होनी चाहिए जिन पर सभी पक्ष भरोसा कर सकें।






