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टैरिफ वॉर के बीच निर्यातकों को राहत, योगी कैबिनेट ने 882 करोड़ की नई निर्यात नीति को दी मंजूरी

Written by:Saurabh Singh
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नई नीति के तहत सेवा क्षेत्र के निर्यातकों के लिए विपणन विकास सहायता योजना शुरू की गई है, जो देश में पहली बार लागू की जा रही है। इसके तहत विदेशी मेलों में स्टॉल किराए और इकोनॉमी क्लास यात्रा खर्च का 75 प्रतिशत, अधिकतम दो लाख और एक लाख रुपये तक की सहायता दी जाएगी।
टैरिफ वॉर के बीच निर्यातकों को राहत, योगी कैबिनेट ने 882 करोड़ की नई निर्यात नीति को दी मंजूरी

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने टैरिफ वार के बीच निर्यातकों को बड़ी राहत देते हुए नई निर्यात प्रोत्साहन नीति 2025-30 को मंजूरी दी है। इस नीति के तहत निर्यातकों को 882 करोड़ रुपये का वित्तीय प्रोत्साहन प्रदान किया जाएगा। अगले पांच वर्षों में राज्य का निर्यात 50 अरब डॉलर तक पहुंचाने और निर्यातकों की संख्या में 50 प्रतिशत वृद्धि का लक्ष्य रखा गया है। गौतमबुद्धनगर में सर्विस ट्रेड फैसिलिटेशन सेंटर की स्थापना के लिए 2.5 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

नई नीति के तहत सेवा क्षेत्र के निर्यातकों के लिए विपणन विकास सहायता योजना शुरू की गई है, जो देश में पहली बार लागू की जा रही है। इसके तहत विदेशी मेलों में स्टॉल किराए और इकोनॉमी क्लास यात्रा खर्च का 75 प्रतिशत, अधिकतम दो लाख और एक लाख रुपये तक की सहायता दी जाएगी। घरेलू अंतरराष्ट्रीय मेलों में भी समान अनुदान प्रदान किया जाएगा। इसके अलावा, एमआईसीई (मीटिंग्स, इंसेंटिव्स, कॉन्फ्रेंस और एक्जीबिशन्स) आयोजनों के लिए प्रति विदेशी प्रतिभागी 7,000 रुपये या प्रति आयोजन 6 लाख रुपये की सहायता दी जाएगी।

तीन लाख रुपये प्रति वर्ष की सहायता

छोटे निर्यातकों को गेटवे पोर्ट तक कम कंटेनर लोड शिपमेंट के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी। अंतरराष्ट्रीय ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर लिस्टिंग शुल्क, जैसे रजिस्ट्रेशन, सेलर, शिपिंग और लॉजिस्टिक्स फीस पर 75 प्रतिशत, अधिकतम तीन लाख रुपये प्रति वर्ष की सहायता मिलेगी। डाकघर निर्यात केंद्रों के माध्यम से माल भेजने वाले निर्यातकों को पोस्टेज शुल्क का 75 प्रतिशत अनुदान दिया जाएगा। इसके अतिरिक्त, निर्यात वृद्धि पर एक प्रतिशत पुरस्कार और निर्यात क्रेडिट गारंटी प्रीमियम का 30 प्रतिशत अनुदान भी प्रदान किया जाएगा।

मर्चेंडाइज्ड ट्रेड फैसिलिटेशन सेंटर की स्थापना

नीति के तहत मर्चेंडाइज्ड ट्रेड फैसिलिटेशन सेंटर की स्थापना के लिए 7.5 करोड़ रुपये और वैश्विक उत्कृष्टता केंद्र के लिए 10 करोड़ रुपये का डेडिकेटेड फंड बनाया जाएगा। निर्यात अवसंरचना के लिए 40 प्रतिशत कैपिटल सब्सिडी और आईआईटी, आईआईएम जैसे संस्थानों में मार्केट रिसर्च चेयर की स्थापना भी की जाएगी। कंटेनर भाड़े के लिए 20 फीट कंटेनर पर 20,000 रुपये और 40 फीट कंटेनर पर 40,000 रुपये की सहायता मिलेगी, जबकि हवाई भाड़े पर 30 प्रतिशत या 150 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से अधिकतम 10 लाख रुपये प्रति वर्ष की सहायता दी जाएगी।

Saurabh Singh
लेखक के बारे में
राजनीति में गहरी रुचि. खबरों के विश्लेषण में तेज और राजनीतिक परिस्थितियों की समझ रखते हैं. देश-दुनिया की घटनाओं पर बारीक नजर और फिर उसे खबरों के रूप में लिखने के शौकीन हैं. View all posts by Saurabh Singh
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