राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी सड़क परियोजनाओं में तेजी आ रही है। तीन प्रमुख एक्सप्रेसवे मार्च अंत या अप्रैल 2026 में यातायात के लिए खोले जा सकते हैं। इनमें मेरठ से प्रयागराज तक गंगा एक्सप्रेसवे, 63 किलोमीटर लंबा लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे और गाजीपुर-बलिया एक्सप्रेसवे शामिल हैं।
योगी आदित्यनाथ सरकार ने एक्सप्रेसवे स्टेट की पहचान बनाने के लिए 22 एक्सप्रेसवे का व्यापक ग्रिड विकसित करने का लक्ष्य रखा है। इसमें ग्रीनफील्ड और लिंक एक्सप्रेसवे दोनों शामिल हैं। बजट में सड़कों के निर्माण और रखरखाव के लिए 15 हजार करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।
मेन कैरिजवे का 96% काम पूरा
मेरठ से प्रयागराज तक फैला गंगा एक्सप्रेसवे राज्य की सबसे बड़ी परियोजनाओं में गिना जाता है। यह हापुड़, बुलंदशहर, अमरोहा, संभल, बदायूं, शाहजहांपुर, हरदोई, उन्नाव, रायबरेली, प्रतापगढ़ सहित 12 जिलों से होकर गुजरेगा। मुख्य सड़क का 96 प्रतिशत से अधिक निर्माण कार्य पूरा हो गया है।
FASTag टोल सिस्टम का परीक्षण सफलतापूर्वक संपन्न हुआ है। मार्च में इस एक्सप्रेसवे को पूरी तरह यातायात के लिए खोल दिया जा सकता है। इसके चालू होने से पश्चिमी उत्तर प्रदेश से पूर्वांचल तक की दूरी काफी घट जाएगी। दिल्ली से लेकर पूर्वांचल तक सफर तेज और आसान हो जाएगा।
18-19 किमी का एलिवेटेड सेक्शन
लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे (NE-6) करीब 63 किलोमीटर लंबा है। यह 6 लेन का एक्सेस-कंट्रोल्ड मार्ग है जिसे भविष्य में 8 लेन तक बढ़ाया जा सकता है। इस पर 18-19 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड सेक्शन बनाया गया है, जो प्रदेश का सबसे लंबा एलिवेटेड एक्सप्रेसवे बन गया है।
फिलहाल लखनऊ से कानपुर का सफर 2.5 से 3 घंटे में पूरा होता है। नए एक्सप्रेसवे के शुरू होने पर यह दूरी महज 35 से 45 मिनट में तय हो सकेगी। परियोजना की कुल लागत लगभग 4700 करोड़ रुपये है। मार्च 2026 के अंत या अप्रैल तक इसे शुरू किए जाने की संभावना जताई जा रही है।
750 किमी लंबा गोरखपुर-शामली एक्सप्रेसवे
करीब 750 किलोमीटर लंबा प्रस्तावित गोरखपुर-शामली एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश का सबसे लंबा एक्सप्रेसवे होगा। यह 22 जिलों से होकर गुजरेगा और पश्चिमी यूपी को सीधे पूर्वांचल से जोड़ेगा। इसकी डीपीआर पूरी हो चुकी है और जमीन अधिग्रहण का काम तेज गति से चल रहा है। निर्माण कार्य 2026-27 में शुरू होने की उम्मीद है।
इन एक्सप्रेसवे परियोजनाओं का फायदा केवल उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं रहेगा। दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे पड़ोसी राज्यों को भी इससे लाभ मिलेगा। औद्योगिक निवेश, पर्यटन और व्यापार को इससे नई गति मिलने की उम्मीद है।





