उत्तर प्रदेश की राजनीति में ‘पीडीए’ (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) को लेकर एक बार फिर सियासी पारा चढ़ गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के एक बयान के बाद समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने तीखी प्रतिक्रिया दी है, जिससे दोनों दलों के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। अखिलेश यादव ने दावा किया है कि लोकसभा चुनाव में हार की हताशा के कारण भाजपा नेता अब पीडीए का नाम सुनते ही डरने लगे हैं।
यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बहराइच में एक सरकारी कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने सपा के पीडीए फॉर्मूले पर जमकर निशाना साधा।
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सीएम योगी ने बहराइच से क्या कहा था?
बहराइच में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान सीएम योगी ने कहा, “जो लोग PDA की बात करते हैं, जब वे सत्ता में आते थे तो केवल अपने परिवार तक ही सीमित हो जाते थे। उन्हें भरथापुर के यादव और यहां की पिछड़ी जाति के लोग याद नहीं आते थे।” मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि जाति के नाम पर समाज को बांटने वाले लोग दंगाइयों को संरक्षण देते थे, जिसके कारण पर्व और त्योहारों से पहले सन्नाटा छा जाता था। उन्होंने कहा कि 2017 के बाद प्रदेश को किसी जातीय चश्मे से नहीं देखा गया और अब त्योहारों के पहले उत्सव का माहौल होता है।
यह कार्यक्रम 118 लाभार्थियों को ₹21.55 करोड़ से अधिक की राशि के हस्तांतरण और 136 परिवारों को मुख्यमंत्री आवास व भूमि के पट्टे वितरित करने के लिए आयोजित किया गया था।
अखिलेश यादव का सोशल मीडिया पर तीखा पलटवार
सीएम योगी के इस बयान के जवाब में पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट के जरिए जोरदार हमला बोला। उन्होंने लिखा कि भाजपा के लोगों को अब सोते-जागते केवल पीडीए ही दिखाई और सुनाई देता है।
“लोकसभा में हार की हताशा और आनेवाले विधानसभा में सत्ता से बाहर होने के बाद अपने कुकर्मों की सज़ा भुगतने के डर से ये PDA का नाम सुनते ही थर-थर काँपने लगे हैं।” — अखिलेश यादव, राष्ट्रीय अध्यक्ष, समाजवादी पार्टी
कन्नौज से सांसद अखिलेश यादव ने आगे लिखा, “जिनको पीडीए के साये से भी परहेज़ है उनकी ज़ुबान को पीडीए बोलने में भी दिक़्क़त आती होगी। जो पीडीए की झोपड़ियों पर बुलडोज़र चलवाते हों… वो मंचों पर मौन रहें।” उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा, “देखते हैं दो दिन बाद इन्हें बड़े मंच पर बोलने का मौका भी दिया जाता है या नमस्ते न करने का दंड देते हुए, प्लास्टिक की कुर्सी पर दूर बैठाया जाता है।”
अखिलेश यादव ने अपने पोस्ट के अंत में लिखा कि मन और वचन का गहरा संबंध होता है और जिनका मन बुरा होता है, उनका कथन भी बुरा ही होता है। इस बयान-बाजी ने आगामी विधानसभा चुनावों से पहले राज्य में राजनीतिक माहौल को और गरमा दिया है।