उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में ईद के दिन सड़क पर नमाज अदा करने को लेकर शुरू हुआ विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। इस मामले में अब यूपी सरकार में दर्जा प्राप्त मंत्री ठाकुर रघुराज सिंह का एक बड़ा और विवादित बयान सामने आया है, जिससे राजनीतिक माहौल गरमा गया है। उन्होंने सड़क पर नमाज पढ़ने को पूरी तरह से गैरकानूनी बताया है।

ठाकुर रघुराज सिंह ने अलीगढ़ में हुई घटना पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि सड़क या किसी भी सार्वजनिक स्थान पर नमाज पढ़ना नाजायज है और इसका पालन नहीं किया जाना चाहिए।

“जिन्हें सड़क पर नमाज पढ़ने में दिक्कत हो रही है, उन्हें पाकिस्तान या इराक चले जाना चाहिए।” — ठाकुर रघुराज सिंह, दर्जा प्राप्त मंत्री, यूपी सरकार

‘दोषी अधिकारियों पर होगी कार्रवाई’

मंत्री ने इस मामले में सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि इस प्रकरण में जो भी अधिकारी दोषी पाए जाएंगे, उनके खिलाफ निश्चित रूप से कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी इस घटना का संज्ञान लिया है। रघुराज सिंह ने कहा, “इसमें मुकदमा भी दर्ज होना चाहिए। यह कानून के खिलाफ है।”

प्रशासन और मौलाना के दावों में अंतर

यह मामला उस वक्त और उलझ गया जब जिला प्रशासन और स्थानीय मौलाना के बयानों में विरोधाभास सामने आया। एक तरफ जहां अलीगढ़ के डीएम संजीव रंजन ने स्पष्ट रूप से कहा कि सड़क पर नमाज नहीं हुई है, वहीं दूसरी ओर एक मौलाना ने इस बात की पुष्टि की कि नमाज सड़क पर ही पढ़ी गई थी। इन अलग-अलग बयानों से यह सवाल खड़ा हो गया है कि आखिर किसकी लापरवाही से यह स्थिति उत्पन्न हुई।

कैसे शुरू हुआ था विवाद?

बता दें कि यह पूरा विवाद ईद के दिन की एक घटना से शुरू हुआ। अलीगढ़ में ईदगाह के बाहर कुछ लोगों ने सड़क पर बैठकर नमाज अदा करना शुरू कर दिया था। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद यह मामला तूल पकड़ गया। बताया जा रहा है कि सूचना मिलने पर प्रशासन ने मौके पर पहुंचकर लोगों को सड़क से हटा दिया था, लेकिन तब तक वीडियो वायरल हो चुका था और इस पर राजनीतिक बयानबाजी शुरू हो गई।