उत्तर प्रदेश में दिन पर दिन विकास की इबारत लिखी जा रही है। अभी प्रदेश सरकार ने इस देश का सबसे बड़ा लॉजिस्टिक हब बनाने का संकल्प लिया है। इसकी मदद से राज्य की अर्थव्यवस्था को एक ट्रिलियन डॉलर का आकार देने का संकल्प किया गया है। वर्तमान में देश की जीडीपी में लॉजिस्टिक लागत 13 से 14% है। अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप इस 7 से 8% तक लाने के लिए सरकार आधुनिक बुनियादी ढांचे को मजबूत करेगी।

इसके लिए प्रदेश में यूपीआई एमएलसी परियोजना के तहत एक्सप्रेसवे के किनारे लॉजिस्टिक क्लस्टर और 27 एकीकृत विनिर्माण विकसित किए जा रहे हैं। इन केसरी वायरिंग हाउस और कस्टम क्लीयरेंस जैसी सुविधाएं लोगों को प्रदेश में आसानी से मिल सकेगी।

विकसित किए जा यह लॉजिस्टिक हब

ग्रेटर नोएडा के बोड़ाकी में इंटीग्रेटेड इंडस्ट्रियल टाउनशिप और लॉजिस्टिक हब विकसित किया जा रहा है। इसे सीधे डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर से जोड़ा जाएगा। इसके अलावा दादरी में मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक पार्क विकसित किया जा रहा है। इसकी मदद से पश्चिम भारत के बंदरगाहों तक माल की आवाजाही निर्बाध रूप से हो सकेगी।

भूमि की गई चिन्हित

ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की ओर से 174.12 एकड़ भूमि का एक विशाल लैंड पार्सल किया गया है। इस भूमि को उत्तर प्रदेश मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक पार्क नीति 2024 के तहत विकसित किया जाएगा।

इसके अलावा सरकार ने 1000 करोड रुपए से अधिक निवेश वाली परियोजनाओं के लिए प्रोत्साहन का प्राविधान भी रखा है। इसके अंतर्गत आवंटित की गई भूमिका 30% की फ्रंट एंड लैंड सब्सिडी प्रदान की जाएगी।