वृंदावन की गलियों में जब भक्ति और उत्सव एक साथ मिलते हैं, तो दृश्य अलौकिक बन जाता है। इन दिनों श्रीधाम वृंदावन स्थित राधावल्लभ मंदिर में चल रहे खिचड़ी उत्सव के दौरान ऐसा ही नज़ारा देखने को मिला, जब ठाकुर राधावल्लभलाल ने क्रिकेटर के रूप में भक्तों को दर्शन दिए। हाथ में बॉल, शरीर पर क्रिकेट की किट और चेहरे पर दिव्य आभा यह दृश्य देखते ही देखते भक्तों के दिल में बस गया।
सुबह-सुबह जैसे ही मंदिर के पट खुले, वैसे ही भक्तों की आंखें इस अनोखे स्वरूप पर टिक गईं। किसी ने मोबाइल से तस्वीरें लीं, तो कोई हाथ जोड़कर भाव में डूब गया। मंदिर परिसर “राधे-राधे” और “जय श्री राधावल्लभ” के जयकारों से गूंज उठा।
खिचड़ी उत्सव में राधावल्लभलाल के विलक्षण दर्शन
राधावल्लभ मंदिर में खिचड़ी उत्सव हर साल सर्दियों के मौसम में मनाया जाता है। इस उत्सव का उद्देश्य ठाकुरजी को ठंड से बचाना और उन्हें गर्माहट देना माना जाता है। सेवायतों द्वारा पंचमेवा से युक्त गर्म खिचड़ी का भोग प्रतिदिन अर्पित किया जाता है। यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है और श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहती है।
खिचड़ी उत्सव लगभग एक महीने तक चलता है। इस दौरान ठाकुर राधावल्लभलाल प्रतिदिन अलग-अलग छद्म रूपों में भक्तों को दर्शन देते हैं। कभी भोलेनाथ, कभी बांकेबिहारी, कभी ग्वाले के रूप में तो कभी माता यशोदा की गोद में बालक कृष्ण के रूप में दर्शन देकर ठाकुरजी भक्तों का मन मोह लेते हैं।
क्रिकेटर रूप में ठाकुरजी के दर्शन से भक्तों में उत्साह
रविवार सुबह मंगला आरती से पहले जब मंदिर के पट खुले, तब ठाकुर राधावल्लभलाल क्रिकेटर के रूप में सजे हुए थे। उनके हाथ में बॉल थी, शरीर पर क्रिकेट की किट और सिर पर विशेष मुकुट शोभा पा रहा था। यह दृश्य इतना अनोखा था कि पहली झलक में ही भक्तों की आंखें भर आईं।
भक्तों का कहना था कि यह स्वरूप आज के समय से जुड़ा हुआ संदेश देता है। जैसे क्रिकेट आज युवाओं का प्रिय खेल है, वैसे ही ठाकुरजी अपने भक्तों के हर रूप और हर भावना को स्वीकार करते हैं। यही वजह है कि राधावल्लभलाल का यह क्रिकेटर रूप लोगों को सीधे दिल से जोड़ गया।
सुबह-सुबह उमड़ी भक्तों की भारी भीड़
ठिठुरन भरी ठंड के बावजूद श्रद्धालुओं की आस्था में कोई कमी नहीं दिखी। सुबह छह बजे से ही मंदिर परिसर में भक्तों की लंबी कतारें लग गई थीं। जैसे-जैसे समय आगे बढ़ा, भीड़ और बढ़ती चली गई। सेवायतों ने जगार के पदों का गायन शुरू किया और खिचड़ी उत्सव के विशेष पद गाए गए। सुबह सात बजे मंगला आरती के समय मंदिर में मौजूद हर व्यक्ति ठाकुरजी के दर्शन में लीन दिखाई दिया। जयकारों की गूंज से पूरा मंदिर परिसर भक्तिमय हो गया। कई श्रद्धालुओं का कहना था कि उन्होंने ऐसा दृश्य पहले कभी नहीं देखा।





