योगी सरकार सत्र 2024-25 के छूटे हुए छह लाख छात्रों को छात्रवृत्ति देने की तैयारी में है, जिसके लिए कैबिनेट में प्रस्ताव रखा जाएगा। समाज कल्याण विभाग 300 करोड़ रुपये का बजट प्रस्तावित करेगा। लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई भी हुई थी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जल्द ही छात्रवृत्ति वितरण कार्यक्रम की शुरुआत करेंगे।

राज्य ब्यूरो, लखनऊ। योगी सरकार शुक्रवार को चालू सत्र के चार लाख छात्र-छात्राओं को तो छात्रवृत्ति बांटेगी ही, पिछले सत्र के उन छह लाख विद्यार्थियों को भी दिवाली गिफ्ट दे सकती है, जो वजीफे से वंचित रह गए थे। इन छूटे हुए छात्रों को सत्र 2024-25 की छात्रवृत्ति और शुल्क प्रतिपूर्ति का भुगतान करने का प्रस्ताव कैबिनेट की बैठक में प्रस्ताव रखा जाएगा। इसको स्वीकृति मिलने के बाद आवेदन की समय सारिणी घोषित होगी और पोर्टल फिर खोला जाएगा।

वित्तीय वर्ष 2024–25 में संबंधित विभागों और शिक्षण संस्थानों की लापरवाही से पूर्वदशम और दशमोत्तर के छह लाख से अधिक विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति और शुल्क प्रतिपूर्ति योजना का लाभ नहीं मिल पाया था। इसमें समाज कल्याण की छात्रवृत्ति योजना के साथ पिछड़ा और अल्पसंख्यक वर्ग के विद्यार्थी भी शामिल थे। संस्थानों और संबंधित विभागों द्वारा डाटा लाक न करने और उसे आगे न बढ़ाने के कारण यह स्थिति बनी थी।

छात्रवृत्ति वितरण कार्यक्रम की शुरुआत कब होगी?

पिछले दिनों समाज कल्याण विभाग और अन्य संबंधित विभागों ने मुख्यमंत्री के समक्ष उस सत्र के वंचित छात्रों को लाभ देने का मामला उठाया था। इसके बाद समाज कल्याण विभाग की ओर से प्रस्ताव तैयार कर भेजा गया है। इसमें भुगतान के लिए 300 करोड़ रुपये की व्यवस्था किया जाना भी शामिल है।

चालू शैक्षिक सत्र के योगी सरकार पहली बार सितंबर से छात्रवृत्ति और शुल्क प्रतिपूर्ति के भुगतान की शु़रुआत करने जा रही है। इसके लिए शुक्रवार को इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ खुद इसकी शु़रुआत करेंगे। वहीं शाम को कैबिनेट की बैठक होनी है। ऐसे में माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री छात्रवृत्ति वितरण कार्यक्रम के दौरान ही पिछले सत्र के वंचित छात्रों को छात्रवृत्ति देने की भी घोषणा कर सकते हैं।

लापरवाह अधिकारियों पर कार्रवाई की गई है?

समाज कल्याण राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार असीम अरुण ने बताया कि सत्र 2024-25 के छूटे हुए छात्रों को लाभ देने का प्रस्ताव कैबिनेट में रखा जाना है, इसके स्वीकृत होने पर आगे की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। पिछले सत्र में विद्यार्थियों के छात्रवृत्ति और शुल्क प्रतिपूर्ति से वंचित होने के मामले की जांच में अधिकारियों की लापरवाही सामने आई थी।

इसके लिए पिछले दिनों वाराणसी, बिजनौर, कन्नौज, औरेया, सीतापुर, बलिया, बरेली, अलीगढ़, गौतमबुद्धनगर, गाजियाबाद, प्रतापगढ़, अयोध्या, बहराइच और रायबरेली के संबंधित जिला समाज कल्याण अधिकारियों और संबंधित लिपिकों को प्रतिकूल प्रविष्टी दी जा चुकी है। बरेली के विभागीय कार्यालय बाबू को निलंबित किया गया था।