उत्तर प्रदेश में अवैध कॉलोनियां बसाने वालों के खिलाफ योगी सरकार सख्त कदम उठाने जा रही है। शहरों में बिना अनुमति के कॉलोनियां बसाकर मोटा मुनाफा कमाने वालों पर नकेल कसने की तैयारी है। इसके लिए सरकार अवैध कॉलोनियों की पहचान के लिए सर्वे कराएगी और ऐसी कॉलोनियों के निर्माण पर तत्काल रोक लगाएगी। साथ ही, पुरानी अवैध कॉलोनियों के जिम्मेदारों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।
प्रदेश के शहरी क्षेत्रों में अवैध कॉलोनियां एक बड़ी समस्या बन चुकी हैं। प्रॉपर्टी डीलर और बिल्डर छोटी-छोटी जमीनों पर बिना लेआउट अनुमति के प्लॉटिंग या मकान बना रहे हैं। इसे रोकने के लिए आवास विभाग 100 नई टाउनशिप विकसित कर रहा है और विकास प्राधिकरणों को जमीन खरीद के लिए वित्तीय सहायता प्रदान कर रहा है। इसका उद्देश्य लोगों को वैध कॉलोनियों में सुरक्षित और किफायती आवास उपलब्ध कराना है।
अवैध कॉलोनियों में मकान खरीदना होगा जोखिम
सरकार ने अवैध कॉलोनियों पर अंकुश लगाने के लिए व्यापक सर्वे का फैसला किया है। इस सर्वे में यह जांचा जाएगा कि कितनी कॉलोनियां विकास प्राधिकरण या आवास विकास परिषद से अनुमति लेकर बन रही हैं। अगर सर्वे के दौरान कोई कॉलोनी अवैध पाई गई, तो उसके निर्माण पर तुरंत रोक लगाई जाएगी। इससे लोगों को अवैध कॉलोनियों में मकान खरीदने के जोखिम, जैसे मकान गिराए जाने के डर, से बचाया जा सकेगा।
अधिकारी अपनी जिम्मेदारी को गंभीरता से निभाएंगे
सर्वे में यह भी देखा जाएगा कि विकास प्राधिकरण के अधिकारियों ने अवैध कॉलोनियों को रोकने के लिए क्या कदम उठाए। अगर अधिकारियों की लापरवाही सामने आई, तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई होगी। सरकार का मानना है कि इससे न केवल अवैध कॉलोनियों को बढ़ावा देने की प्रवृत्ति पर रोक लगेगी, बल्कि अधिकारी भी अपनी जिम्मेदारी को गंभीरता से निभाएंगे। साथ ही, पात्र कॉलोनियों को वैध करने के लिए रेजीडेंट वेलफेयर एसोसिएशन को मौका दिया जाएगा।





