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आदि कैलाश यात्रा होगी आसान, बुंदी-गर्ब्यांग के बीच बनेगी लंबी सुरंग, रास्ता होगा 22 किमी छोटा

Written by:Neha Sharma
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उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में आदि कैलाश और ओम पर्वत की यात्रा अब और आसान होने जा रही है। केंद्र सरकार ने बुंदी से गर्ब्यांग के बीच 5.4 किलोमीटर लंबी सुरंग बनाने की मंजूरी दे दी है।
आदि कैलाश यात्रा होगी आसान, बुंदी-गर्ब्यांग के बीच बनेगी लंबी सुरंग, रास्ता होगा 22 किमी छोटा

उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में आदि कैलाश और ओम पर्वत की यात्रा अब और आसान होने जा रही है। केंद्र सरकार ने बुंदी से गर्ब्यांग के बीच 5.4 किलोमीटर लंबी सुरंग बनाने की मंजूरी दे दी है। इस सुरंग के बनने से न केवल यात्रा का रास्ता 22 किलोमीटर छोटा होगा, बल्कि सफर का समय भी काफी कम हो जाएगा। यह परियोजना कैलाश मानसरोवर और आदि कैलाश यात्रा मार्ग को और सुरक्षित तथा सुविधाजनक बनाएगी। कुल 1600 करोड़ रुपये की लागत से तैयार होने वाली यह परियोजना सीमांत क्षेत्रों के विकास में मील का पत्थर साबित होगी।

छियालेख की पहाड़ी पर बनेगी सुरंग

केंद्रीय सड़क परिवहन राज्यमंत्री अजय टम्टा ने अपने पिथौरागढ़ दौरे के दौरान बताया कि यह सुरंग छियालेख की पहाड़ी पर बनाई जाएगी। वर्तमान में इस इलाके की सड़कों की हालत बेहद खराब है, जिससे बड़े वाहनों का गुजरना मुश्किल होता है। बरसात के दौरान अक्सर सड़कें मलबा गिरने से बंद हो जाती हैं। सुरंग के बनने से ये समस्याएं खत्म होंगी और यात्रा सालभर सुगम और सुरक्षित बन जाएगी।

धारचूला-लिपुलेख सड़क का 90% काम पूरा

टम्टा ने बताया कि धारचूला से लिपुलेख तक सड़क निर्माण का करीब 90 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है। हालांकि छियालेख का हिस्सा अब भी चुनौती बना हुआ है, क्योंकि इस क्षेत्र में तीखी ढलानें और 27 खतरनाक मोड़ हैं। इनमें कई मोड़ लगभग 90 डिग्री के हैं, जहां वाहनों को निकलने में कठिनाई होती है। सुरंग के बनने से इन मोड़ों से बचाव होगा और यात्रा में आने वाली प्राकृतिक बाधाएं काफी हद तक दूर होंगी।

सामरिक दृष्टि से भी अहम परियोजना

यह सुरंग न केवल तीर्थयात्रियों और पर्यटकों के लिए, बल्कि सैन्य दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह मार्ग चीन और नेपाल की सीमा के पास से गुजरता है, जहां सेना, आईटीबीपी और एसएसबी की तैनाती है। सुरंग बनने के बाद सुरक्षा बलों की आवाजाही तेज़ और आसान होगी, जिससे सीमा प्रबंधन और निगरानी क्षमता और मजबूत होगी।

स्थानीय विकास और पर्यटन को नई दिशा

सुरंग बनने से गर्ब्यांग, गुंजी, नाबी और कुटी जैसे छह दूरस्थ गांवों के लोगों को बड़ी राहत मिलेगी। अब उन्हें बाजार, स्कूल और अस्पताल तक पहुंचने में आसानी होगी। इसके साथ ही आदि कैलाश और ओम पर्वत यात्रा में श्रद्धालुओं की संख्या भी बढ़ेगी। इससे सीमांत इलाकों में धार्मिक पर्यटन और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। भूमि अधिग्रहण के लिए 137 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं, जिनमें से लगभग 60 प्रतिशत राशि प्रभावित परिवारों को दी जा चुकी है।

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