Hindi News

श्रद्धालुओं के लिए बड़ी खबर, बद्रीनाथ धाम के कपाट खुलने की तारीख और शुभ मुहूर्त घोषित, 19 अप्रैल से शुरू होगी चार धाम की यात्रा

Written by:Shyam Dwivedi
Published:
बसंत पंचमी के शुभ अवसर पर टिहरी रियासत के नरेंद्रनगर राजमहल में आयोजित धार्मिक समारोह में श्री बद्रीनाथ धाम के कपाट खुलने की तिथि और समय की घोषणा कर दी गई है।
श्रद्धालुओं के लिए बड़ी खबर, बद्रीनाथ धाम के कपाट खुलने की तारीख और शुभ मुहूर्त घोषित, 19 अप्रैल से शुरू होगी चार धाम की यात्रा

उत्तराखंड की प्रसिद्ध चारधाम यात्रा को लेकर श्रद्धालुओं में हर साल उत्साह रहता है। इस साल चार धाम यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए खुशखबरी है। साल 2026 के लिए चार धाम यात्रा शुरू होने वाली है। इसके लिए बसंत पंचमी के शुभ अवसर पर टिहरी रियासत के नरेंद्रनगर राजमहल में आयोजित धार्मिक समारोह में श्री बद्रीनाथ धाम के कपाट खुलने की तिथि और समय की घोषणा कर दी गई है।

बद्रीनाथ कपाट खोलने की तारीख और मुहूर्त

राजपुरोहित आचार्य कृष्ण प्रसाद उनियाल ने पंचांग, ग्रह-नक्षत्र और शुभ योगों का अध्ययन कर बताया कि 23 अप्रैल को सुबह 6 बजकर 15 मिनट का समय कपाट खोलने के लिए शुभ है। वैदिक मंत्रोच्चार और पारंपरिक अनुष्ठानों के बाद विधिवत रूप से तिथि घोषित की गई।

बता दें कि भगवान बद्रीनाथ धाम के कपाट बीते 25 नवंबर को शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए थे। यह वार्षिक चार धाम यात्रा के समापन का प्रतीक है। उसके बाद से बद्री विशाल की शीतकालीन गद्दी स्थल पांडुकेश्वर में पूजा अर्चना चल रही है।

19 अप्रैल से शुरू होगी चार धाम की यात्रा

बता दें कि परंपरा के अनुसार, गंगोत्री और यमुनोत्री मंदिर के कपाट अक्षय तृतीया पर 19 अप्रैल को खुलेंगे। वहीं केदारनाथ मंदिर के कपाट खोलने की तिथि महाशिवरात्रि के दिन तय होगी। उत्तराखंड की चारधाम यात्रा की शुरुआत 19 अप्रैल से हो जाएगी।

कैसे खुलते हैं बद्रीनाथ धाम के कपाट?

बता दें कि बद्रीनाथ धाम के कपाट खुलने की प्रक्रिया पूरी तरह शास्त्रों और परंपराओं के अनुसार होती है। कपाट खुलने से पहले भगवान बद्री विशाल की पूजा-अर्चना विशेष विधि से की जाती है। सबसे पहले मंदिर परिसर को फूलों से सजाया जाता है और सिंहद्वार पर पारंपरिक ढंग से पूजा होती है। कपाट खुलने के दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में गणेश पूजा के साथ कार्यक्रम की शुरुआत होती है। इसके बाद शंखनाद और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच मंदिर के मुख्य द्वार के ताले खोले जाते हैं। जैसे ही कपाट खुलते हैं, मंदिर परिसर “जय बद्री विशाल” के जयकारों से गूंज उठता है।

कपाट खुलने के बाद सबसे पहले भगवान बद्रीनाथ के अखंड दीप के दर्शन कराए जाते हैं, जो शीतकाल में भी निरंतर जलता रहता है। इसके बाद भगवान की महाभिषेक पूजा होती है और विशेष श्रृंगार किया जाता है। कपाट खुलने के पहले दिन केवल सीमित समय के लिए ही श्रद्धालुओं को दर्शन की अनुमति दी जाती है।

आपको मालूम हो कि चारधाम यात्रा उत्तराखंड के चार पवित्र तीर्थों केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री की यात्रा है। ऐसी धार्मिक मान्यता है कि चारधाम यात्रा करने से सभी पाप धुल जाते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है। हिंदू धर्म में हर व्यक्ति को कम से कम एक बार चारधाम यात्रा करने की सलाह दी जाती है।