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उत्तराखंड में UCC की प्रथम वर्षगांठ: मुख्यमंत्री धामी ने कहा- ‘आज का दिन स्वर्णिम अध्याय के रूप में अंकित रहेगा’

Written by:Shyam Dwivedi
Published:
उत्तराखंड में यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) लागू हुए मंगलवार, 27 जनवरी 2026 को पूरा एक साल हो गया है। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने देहरादून में आयोजित कार्यक्रम में कहा कि आज का दिन उत्तराखंड राज्य के इतिहास में स्वर्णिम अध्याय के रूप में अंकित रहेगा।
उत्तराखंड में UCC की प्रथम वर्षगांठ: मुख्यमंत्री धामी ने कहा- ‘आज का दिन स्वर्णिम अध्याय के रूप में अंकित रहेगा’

उत्तराखंड में यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) लागू हुए मंगलवार, 27 जनवरी 2026 को पूरा एक साल हो गया है। इस मौके पर धामी सरकार राज्य में UCC दिवस मना रही है। मुख्यमंत्री पु​ष्कर सिंह धामी ने देहरादून में आयोजित प्रथम देवभूमि UCC दिवस समारोह में शिरकत की और कार्यक्रम को संबोधित किया। इसके अलावा मुख्यमंत्री धामी ने समान नागरिक संहिता को तैयार करने वाले कमेटी के सदस्यों, प्रशासनिक अधिकारियों और पंजीकरण में योगदान देने वाले वीएलसी को सम्मानित किया। साथ ही, यूसीसी आधारित फोटो प्रदर्शनी का भी शुभारंभ किया।

मुख्यमंत्री धामी ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि आज का दिन उत्तराखंड राज्य के इतिहास में स्वर्णिम अध्याय के रूप में अंकित रहेगा। इसी दिन राज्य में समान नागरिक संहिता लागू हुई है, जिससे समाज में सामाजिक न्याय, समानता और संवैधानिक मूल्यों की स्थापना सुनिश्चित हो सकी।

महिला सशक्तिकरण के नए युग की शुरुआत

सीएम ने कहा, समाज में कुछ समुदायों के लिए अलग-अलग व्यक्तिगत कानूनों के कारण भेदभाव, असमानता और अन्याय की स्थिति बनी हुई थी। यूसीसी लागू होने से न केवल राज्य से सभी नागरिकों को समान अधिकार प्राप्त हुए हैं, बल्कि प्रदेश में महिला सशक्तिकरण के एक नए युग की शुरुआत भी हुई है। अब उत्तराखण्ड की मुस्लिम बहन-बेटियों को हलाला, इद्दत, बहुविवाह, बाल विवाह और तीन तलाक जैसी कुरीतियों से मुक्ति मिली है।

यूसीसी लागू होने के बाद एक भी बहुविवाह का मामला नहीं

उन्होंने कहा कि यूसीसी लागू होने के बाद राज्य में एक भी हलाला या बहुविवाह का मामला सामने नहीं आया। यही कारण है कि मुस्लिम महिलाओं ने इस कानून का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता के पश्चात कई दशकों तक वोट बैंक की राजनीति के कारण, यूसीसी को लागू करने का साहस नहीं दिखाया गया। जबकि दुनिया के सभी विकसित और सभ्य देशों सहित प्रमुख मुस्लिम राष्ट्रों में समान नागरिक संहिता पहले से ही लागू है।

लिव-इन रिलेशनशिप के लिए पंजीकरण अनिवार्य

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान समय को देखते हुए युवक-युवतियों की सुरक्षा सुनिश्चित के उद्देश्य से इस कानून में लिव-इन रिलेशनशिप के लिए पंजीकरण अनिवार्य किया गया है। पंजीकरण कराने वाले युगल की सूचना रजिस्ट्रार उनके माता-पिता या अभिभावक को देगा, ये जानकारी पूर्णतः गोपनीय रखी जा रही है। लिव-इन के दौरान जन्में बच्चों को उस युगल का बच्चा ही मानते हुए, उसे जैविक संतान के समान समस्त अधिकार प्रदान किए गए हैं।

यूसीसी में सभी धर्मों के लोगों के लिए नियम एक समान

यूसीसी में सभी धर्मों के लोगों के लिए विवाह, विवाह-विच्छेद एवं उत्तराधिकार आदि से संबंधित नियमों को एक समान किया गया है। साथ ही संपत्ति के बंटवारे और बाल अधिकारों के विषय में भी स्पष्ट कानून बनाए गए हैं। संपत्ति के अधिकार में बच्चों में किसी भी प्रकार का भेद नहीं किया गया है, किसी भी व्यक्ति की मृत्यु होने के पश्चात उसकी संपत्ति को लेकर परिवार के सदस्यों के बीच किसी प्रकार के मतभेद की स्थिति उत्पन्न न हो, इसके लिए मृतक की सम्पत्ति पर उसकी पत्नी, बच्चों एवं माता पिता को समान अधिकार प्रदान किए गए हैं।

घर बैठे सेवाएं, सरकारी दफ्तरों के चक्कर से मिली राहत

मुख्यमंत्री धामी ने बताया कि उत्तराखंड समान नागरिक संहिता लागू होने के बाद इससे संबंधित लगभग शत प्रतिशत आवेदन यूसीसी पोर्टल के जरिए हो रहे हैं। इसमें आवेदक घर बैठे ही किसी भी सेवा के लिए आवेदन कर सकता है। इस तरह उन्हें किसी भी सरकारी कार्यालय या अधिकारी के सामने उपस्थित होने की जरूरत नहीं है। इसके साथ ही पोर्टल में नागरिकों की निजी जानकारी को सुरक्षित और गोपनीय रखने के लिए मजबूत सुरक्षा प्रावधान किए गए हैं।

उन्होंने कहा कि समान नागरिक संहिता को लेकर कुछ लोगों ने शुरुआत में नकारात्मक माहौल बनाने का प्रयास किया। विगत एक साल में यूसीसी क्रियान्वयन ने ऐसे सभी लोगों को जवाब दे दिया है। समान नागरिक संहिता नागरिकों की निजता का शत प्रतिशत पालन करने में सफल रही है। साथ ही पूरे प्रदेश में जितनी सरलता से इस प्रक्रिया को पूरा किया जा रहा है, वो अपने आप में गुड गर्वनेंस का उदाहरण है।