उत्तराखंड सरकार की अवैध धार्मिक संरचनाओं के खिलाफ जारी मुहिम के तहत मंगलवार को हरिद्वार जिला प्रशासन ने एक और बड़ी कार्रवाई की। रानीपुर कोतवाली क्षेत्र के पथरी रोह पुल के पास करीब दो बीघा सरकारी जमीन पर बनी एक अवैध मजार को प्रशासन ने बुलडोजर चलाकर ध्वस्त कर दिया। कार्रवाई के दौरान भारी पुलिस बल की तैनाती की गई थी ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से बचा जा सके। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर राज्य में अवैध निर्माणों के खिलाफ अभियान तेज कर दिया गया है।

हरिद्वार में प्रशासन की बड़ी कार्रवाई

जानकारी के अनुसार, यह मजार सिंचाई विभाग की जमीन पर बनाई गई थी। विभाग की ओर से पहले ही अतिक्रमणकर्ताओं को नोटिस जारी किया गया था और निर्धारित समय सीमा में संरचना हटाने को कहा गया था। लेकिन समय बीत जाने के बाद भी कोई कदम नहीं उठाया गया, जिसके बाद प्रशासन ने सख्ती दिखाते हुए मजार को पूरी तरह से जमींदोज कर दिया। अधिकारियों का कहना है कि सरकारी जमीन पर किसी भी प्रकार के धार्मिक या व्यावसायिक अवैध निर्माण को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के सख्त निर्देशों के बाद पूरे राज्य में सरकारी भूमि पर बने अवैध धार्मिक ढांचों को हटाने का अभियान लगातार चल रहा है। मुख्यमंत्री ने पहले ही स्पष्ट किया था कि कोई भी व्यक्ति “हरे रंग की चादर डालकर” सरकारी जमीन पर कब्जा नहीं कर पाएगा। उन्होंने हाल ही में जानकारी दी थी कि अब तक 9000 एकड़ से अधिक सरकारी भूमि को अवैध कब्जों से मुक्त कराया जा चुका है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य की संस्कृति और पहचान से किसी भी तरह का खिलवाड़ स्वीकार्य नहीं है।

जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही धामी सरकार

धामी सरकार लैंड जिहाद, लव जिहाद और थूक जिहाद जैसी प्रवृत्तियों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है। सरकार ने प्रशासन को निर्देश दिए हैं कि किसी भी जिले में अवैध धार्मिक ढांचा या कब्जा मिलने पर तत्काल कार्रवाई की जाए। इसके साथ ही राज्य में धर्मांतरण विरोधी और दंगा विरोधी कानूनों को सख्ती से लागू किया जा रहा है ताकि सामाजिक सौहार्द और कानून व्यवस्था बनी रहे।

हरिद्वार प्रशासन ने कहा है कि जिले में सभी सरकारी विभागों को अपनी भूमि की पहचान कर रिपोर्ट देने के आदेश दिए गए हैं। जिन स्थानों पर अवैध धार्मिक ढांचे पाए जाएंगे, वहां आगामी दिनों में इसी तरह की कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई किसी धर्म विशेष के खिलाफ नहीं है, बल्कि कानून का पालन कराने और सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा के लिए की जा रही है।