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घूमने का है प्लान तो उत्तराखंड की इन 5 खूबसूरत जगहों को करें लिस्ट में शामिल, भीड़भाड़ से दूर ये जगहें कराएंगी जन्नत का अहसास

Written by:Deepak Kumar
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घूमने का है प्लान तो उत्तराखंड की इन 5 खूबसूरत जगहों को करें लिस्ट में शामिल, भीड़भाड़ से दूर ये जगहें कराएंगी जन्नत का अहसास

उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल जिले में स्थित एक बेहद खूबसूरत हिल स्टेशन है। यह मसूरी और चंबा के बीच बसा हुआ है और समुद्र तल से लगभग 8,500 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। काणाताल की खासियत इसका शांत वातावरण, बर्फ से ढके हिमालयी पर्वतों का शानदार नजारा और प्राकृतिक सुंदरता है। यह जगह कैंपिंग, ट्रेकिंग और बोनफायर जैसी गतिविधियों के लिए आदर्श मानी जाती है। देहरादून से यह 80 किमी और मसूरी से लगभग 40 किमी दूर है।

भद्रराज मंदिर: आध्यात्मिक और प्राकृतिक सौंदर्य

देहरादून जिले में स्थित भद्रराज मंदिर भगवान भद्रराज (भगवान कृष्ण के बड़े भाई बलराम) को समर्पित एक प्राचीन मंदिर है। यह मंदिर जौनसार-बावर की पहाड़ियों में, मसूरी के पास ऊंचाई पर स्थित है। यहां से घाटियों और हिमालय की चोटियों का अद्भुत नजारा दिखाई देता है। देहरादून से भद्रराज मंदिर की दूरी करीब 55–60 किलोमीटर है। यहां ट्रेकिंग का अनुभव लेना भी खास होता है।

नागथात: ट्रेकिंग का स्वर्ग

नागथात देहरादून जिले के जौनसार-बावर क्षेत्र में स्थित एक ऊंचा ट्रेकिंग स्थल है। यह स्थान हिमालय की तलहटी में बसा है और यहां से बंदरपुंछ व स्वर्गारोहिणी जैसी हिमालयी चोटियों के शानदार दृश्य देखने को मिलते हैं। सूर्योदय और सूर्यास्त के समय आसमान और हिमालय का रंग बदलता देखना पर्यटकों के लिए अविस्मरणीय अनुभव होता है। यह जगह शांति, सुकून और प्रकृति प्रेमियों के लिए आदर्श है।

हनोल: धार्मिक और पर्यटन स्थल

हनोल देहरादून जिले के जौनसार-बावर क्षेत्र में टोंस नदी के किनारे बसा एक प्राचीन धार्मिक स्थल है। यह उत्तरकाशी और हिमाचल प्रदेश की सीमा के पास स्थित है। हनोल का महासू देवता मंदिर और इसके आसपास का प्राकृतिक सौंदर्य काफी प्रसिद्ध है। यहां ट्रेकिंग, ग्रामीण पर्यटन और नदी किनारे कैंपिंग का आनंद लिया जा सकता है। देहरादून से हनोल की दूरी लगभग 180 किलोमीटर है।

लाखामंडल: महाभारत से जुड़ा ऐतिहासिक स्थल

लाखामंडल, देहरादून जिले के जौनसार-बावर क्षेत्र में स्थित एक ऐतिहासिक और धार्मिक स्थल है। इसका संबंध महाभारत काल से है। मान्यता है कि पांडवों ने दुर्योधन की साजिश से बचने के लिए यहीं लाक्षागृह (लाख का महल) बनवाया था। देहरादून से इसकी दूरी करीब 100 किलोमीटर है। यहां हरे-भरे जंगल, ट्रेकिंग रूट्स और प्राकृतिक सौंदर्य पर्यटकों को आकर्षित करते हैं।

नागटिब्बा और टिहरी डैम: रोमांच और प्राकृतिक खूबसूरती

नागटिब्बा ट्रेकिंग और साहसिक गतिविधियों में रुचि रखने वालों के लिए बेहतरीन जगह है। समुद्र तल से 3,048 मीटर की ऊंचाई पर स्थित नागटिब्बा से बंदरपुंछ पर्वत श्रृंखला का भव्य दृश्य देखा जा सकता है। देहरादून से इसकी दूरी लगभग 85 किलोमीटर है। दूसरी ओर, चंबा के पास स्थित टिहरी डैम जलक्रीड़ा, बोटिंग और एडवेंचर स्पोर्ट्स के लिए प्रसिद्ध है। यहां हरियाली और हिमालय का मनोहारी नजारा यात्रियों का मन मोह लेता है।

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लेखक के बारे में
तेज ब्रेकिंग के साथ सटीक विश्लेषण और असरदार लेखन में माहिर हैं। देश-दुनिया की हलचल पर नजर रखते हैं और उसे सरल व असरदार तरीके से लिखना पसंद करते हैं। तीन सालों से खबरों की दुनिया से जुड़े हैं। View all posts by Deepak Kumar
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