ऋषिकेश बाईपास को 4-लेन बनाने के लिए केंद्र सरकार ने ₹1105.79 करोड़ की मंजूरी दे दी है। दरअसल मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के लगातार प्रयासों और केंद्र सरकार से की गई पैरवी के बाद भारत सरकार के सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने इस महत्वपूर्ण परियोजना को तकनीकी, प्रशासनिक और वित्तीय मंजूरी दे दी है। यह मंजूरी उत्तराखंड में सड़क व्यवस्था को बेहतर बनाने और यातायात को आसान करने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।
दरअसल मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी लंबे समय से इस महत्वपूर्ण परियोजना के लिए केंद्र सरकार से लगातार संपर्क में थे। उनके लगातार प्रयासों और दिल्ली में की गई मजबूत पैरवी का ही परिणाम है कि मंत्रालय ने इस इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजना को मंजूरी दे दी है। राज्य सरकार का मानना है कि यह परियोजना उत्तराखंड के विकास में अहम भूमिका निभाएगी और राज्य की आर्थिक गतिविधियों को नई गति देगी।
वहीं लगभग 12.670 किलोमीटर लंबा यह बाईपास राष्ट्रीय राजमार्ग-7 पर टीनपानी फ्लाईओवर (किमी 529.750) से लेकर खरासोटे पुल (किमी 542.420) तक बनाया जाएगा। यह सड़क परियोजना ऋषिकेश के भट्टोवाला और ढालवाला गांवों से होकर गुजरेगी। इसका निर्माण इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट और कंस्ट्रक्शन (EPC) मोड पर किया जाएगा। इस व्यवस्था में ठेकेदार को डिजाइन बनाने, सामग्री खरीदने और निर्माण करने की पूरी जिम्मेदारी दी जाती है, जिससे काम तेजी से और तय समय में पूरा होने की संभावना बढ़ जाती है और निर्माण की गुणवत्ता भी बनी रहती है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस मंजूरी पर खुशी जताई
वहीं मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस मंजूरी पर खुशी जताई है। उन्होंने कहा है कि राज्य सरकार प्रदेश में सड़क कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने के लिए लगातार काम कर रही है और यह परियोजना उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। सीएम धामी ने बताया है कि ऋषिकेश बाईपास बनने के बाद क्षेत्र में यातायात का दबाव काफी कम हो जाएगा। इससे ऋषिकेश शहर में लगने वाले लंबे जाम से स्थानीय लोगों को बड़ी राहत मिलेगी और उनका दैनिक जीवन आसान हो जाएगा।
चारधाम यात्रा को आसान बनाएगा यह बाईपास: CM धामी
इसके अलावा मुख्यमंत्री ने यह भी कहा है कि यह बाईपास उत्तराखंड की प्रमुख चारधाम यात्रा के तीर्थयात्रियों और अन्य पर्यटकों के लिए यात्रा को आसान बनाएगा। चारधाम यात्रा के लिए ऋषिकेश एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जाता है और यहां लगने वाला जाम यात्रियों के लिए बड़ी परेशानी बन जाता था। नई सड़क बनने से पर्यटन गतिविधियां भी बढ़ेंगी, जिससे राज्य के आर्थिक विकास को नई गति मिलेगी और स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि “यह परियोजना उत्तराखंड के विकास और बेहतर सड़क कनेक्टिविटी की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। हमारी सरकार राज्य के दूरदराज और शहरों को मजबूत सड़क नेटवर्क से जोड़ने के लिए लगातार काम कर रही है।”
परियोजना की शुरुआती लागत ₹1151.18 करोड़ तय की गई थी
मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार इस परियोजना की शुरुआती लागत ₹1151.18 करोड़ तय की गई थी। बाद में विस्तृत समीक्षा और तकनीकी जांच के बाद इसे घटाकर ₹1139.40 करोड़ कर दिया गया था। अंत में ₹1105.79 करोड़ की अंतिम मंजूरी दी गई है। यह प्रक्रिया परियोजना की लागत को नियंत्रित रखने और सरकारी धन का सही उपयोग सुनिश्चित करने के लिए की गई है।
इस परियोजना को तीन साल की तय समय सीमा में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। भारत सरकार के सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि काम में किसी भी प्रकार की देरी या अतिरिक्त खर्च स्वीकार नहीं किया जाएगा, ताकि परियोजना तय समय और बजट में पूरी की जा सके। परियोजना के लिए टेंडर ई-टेंडरिंग प्रक्रिया के माध्यम से जारी किए जाएंगे, जिससे पूरी प्रक्रिया पारदर्शी बनी रहे। सभी निर्माण कार्य तय नियमों और गुणवत्ता मानकों के अनुसार किए जाएंगे।
इस परियोजना का खर्च वित्त वर्ष 2025-26 में भारत सरकार के बजट प्रावधान के तहत किया जाएगा। परियोजना के वित्तीय प्रबंधन और काम की निगरानी के लिए देहरादून के क्षेत्रीय अधिकारी को ड्रॉइंग एवं डिस्बर्सिंग ऑफिसर (DDO) नियुक्त किया गया है। यह अधिकारी परियोजना से जुड़े सभी वित्तीय कार्यों और दस्तावेजों की निगरानी करेंगे।






