समाज को नई दिशा दिखाने और नौनिहालों के भविष्य को संवारने का काम कर रहे हैं पौड़ी जिले के राजकीय इंटर कॉलेज कल्जीखाल में सहायक अध्यापक आशीष नेगी। टिहरी जिले के देवप्रयाग के मूल निवासी आशीष नेगी ने अपने बचपन में आर्थिक तंगी और परेशानियों को करीब से देखा। इन्हीं अनुभवों ने उन्हें प्रेरित किया कि वे नई पीढ़ी को बेहतर भविष्य की ओर ले जाने के लिए काम करें। आज वे न केवल बच्चों को शिक्षा दे रहे हैं, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए हर संभव प्रयास भी कर रहे हैं।
दरअसल, जिन बच्चों की शिक्षा की राह में गरीबी और अभाव रोड़ा बन रहे थे, उन्हें सहारा देने का संकल्प लिया शिक्षक आशीष नेगी ने। 2011 में जीआइसी एकेश्वर में नियुक्ति मिलने के बाद उन्होंने पढ़ाई के साथ-साथ बच्चों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी काम शुरू किया। 2018 में उन्होंने “दगड्या समूह” नाम से एक ग्रुप बनाया, जिसमें प्राइमरी से लेकर इंटरमीडिएट तक के बच्चे जुड़े। शुरुआत में एकेश्वर, कल्जीखाल और पौड़ी के 90 बच्चे इस समूह से जुड़े थे। वर्तमान में 50 बच्चे सक्रिय रूप से इससे जुड़े हैं और पढ़ाई के साथ हुनर भी सीख रहे हैं।
गरीब बच्चों की शिक्षा का उठा रहे पूरा खर्च
आशीष नेगी न केवल प्रेरणा दे रहे हैं बल्कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों की शिक्षा का पूरा खर्च भी उठा रहे हैं। इस समय 40 बच्चों की वार्षिक फीस, यूनिफॉर्म, किताबें, जूते और पढ़ाई से जुड़ी हर जरूरत वह खुद पूरी कर रहे हैं। अगस्त 2024 में जीआइसी कल्जीखाल में स्थानांतरण होने के बाद भी उन्होंने अपने अभियान को जारी रखा। उनकी इस पहल से बच्चों में आत्मविश्वास बढ़ा है और वे बिना चिंता के अपनी पढ़ाई पूरी कर पा रहे हैं। शिक्षा को लेकर उनकी यह लगन उन्हें खास बनाती है।
प्रशिक्षण से बनाया हुनरमंद
आशीष नेगी अब तक प्रदेश के विभिन्न जिलों में आयोजित कार्यशालाओं के माध्यम से 45 हजार से अधिक बच्चों को प्रशिक्षण दे चुके हैं। उन्होंने चित्रकला, मुखोटा कला, लुग्दी से मूर्ति निर्माण और रेखांकन जैसी विधाओं में बच्चों को प्रशिक्षित किया है। गढ़वाल मंडल में वह “सृजन क्षमता यात्रा” भी निकालते हैं, जिससे युवाओं को उत्तराखंड की लोक कला, लोक संस्कृति और चित्रकला के प्रति जागरूक किया जाता है। इस प्रयास से बच्चे न केवल पढ़ाई में बल्कि कला और कौशल के क्षेत्र में भी अपनी पहचान बना रहे हैं।
पुस्तकालय और नवाचार से मिला सहारा
दगड्या समूह के माध्यम से आशीष नेगी ने पौड़ी और एकेश्वर में पुस्तकालय बनाए हैं। इनमें बच्चों के पाठ्यक्रम, प्रतियोगी परीक्षाओं और साहित्य से जुड़ी कई किताबें उपलब्ध हैं। यही नहीं, इन पुस्तकालयों को नवाचार का केंद्र भी बनाया गया है। वर्ष 2021-22 से यहां बच्चे झंगोरा, तिल, चावल और रुद्राक्ष से आर्गेनिक राखी बनाते हैं, जिन्हें बाजार में बेचकर आय अर्जित की जाती है। इस आय से आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों की मदद की जाती है। इस तरह आशीष ने शिक्षा को सामाजिक सरोकार से जोड़कर एक नई मिसाल कायम की है।





