देवभूमि उत्तराखंड के रुड़की क्षेत्र के मंगलौर में वैश्विक राजनीति की तपिश महसूस की गई, जब शिया समुदाय के हजारों लोग अमेरिका के खिलाफ सड़कों पर उतर आए। ईरान के एक शीर्ष नेता के निधन की खबर को लेकर हुए इस प्रदर्शन में भारी आक्रोश देखने को मिला और अमेरिका के विरोध में जमकर नारेबाजी हुई। प्रदर्शनकारियों ने अमेरिका को तानाशाही मानसिकता वाला देश करार दिया।
यह विशाल प्रदर्शन मोहल्ला पठानपुरा स्थित बड़े इमामबाड़े से शुरू हुआ, जहां सुबह से ही लोगों का हुजूम जुटना शुरू हो गया था। कुछ ही देर में यह भीड़ एक बड़े जुलूस में तब्दील हो गई। इस प्रदर्शन की एक खास बात यह रही कि इसमें पुरुषों के साथ-साथ महिलाओं ने भी बड़ी संख्या में हिस्सा लिया।
‘अन्याय के खिलाफ आवाज उठाना हमारा अधिकार’
प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे स्थानीय धर्मगुरुओं और समुदाय के नेताओं ने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि वे किसी भी प्रकार की हिंसा के पक्षधर नहीं हैं। हालांकि, उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण तरीके से अन्याय के खिलाफ अपनी आवाज उठाना उनका लोकतांत्रिक अधिकार है। प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने कहा कि किसी भी निर्दोष व्यक्ति की जान लेना मानवता के खिलाफ एक गंभीर अपराध है।
“शहादत किसी अंत का नहीं, बल्कि एक विचार की निरंतरता का प्रतीक है। इतिहास गवाह है कि तानाशाही कभी स्थायी नहीं रहती।” — प्रदर्शनकारी नेता
समुदाय के लोगों ने अपने नेता को शहीद का दर्जा देते हुए कहा कि अन्याय के विरुद्ध आवाज उठाना आवश्यक है। उन्होंने धार्मिक प्रसंगों का उल्लेख करते हुए अपनी बात रखी।
प्रशासन रहा मुस्तैद, शांति की अपील
हजारों की संख्या में लोगों के सड़क पर उतरने की सूचना पर स्थानीय प्रशासन और पुलिस पूरी तरह से सतर्क रही। मौके पर भारी पुलिस बल और प्रशासनिक अधिकारी मौजूद थे, जो लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए थे। अधिकारियों ने बताया कि प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा और हालात पूरी तरह से नियंत्रण में हैं। प्रदर्शन के अंत में समुदाय के लोगों ने भारत सरकार से देश में अमन, चैन और भाईचारा बनाए रखने की अपील की। उन्होंने यह भी आग्रह किया कि अंतरराष्ट्रीय घटनाओं का असर स्थानीय सौहार्द पर न पड़े, इसके लिए सभी को संयम से काम लेना चाहिए।






