देहरादून। उत्तराखंड की धामी सरकार ने किसानों से धान और गेहूं की खरीद के लिए 1,100 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। वित्त वर्ष 2026-27 के अनुपूरक बजट में अन्नपूर्ति योजना के तहत यह राशि प्रस्तावित की गई है। इसके साथ ही पहाड़ी इलाकों में खेती, कृषि उत्पादों से छोटे कारोबार, किसान पेंशन, मछली पालन और मधुमक्खी पालन के लिए भी बजट रखा गया है। सरकार का उद्देश्य फसलों की खरीद की व्यवस्था को मजबूत करने के साथ किसानों के लिए कमाई के दूसरे रास्ते तैयार करना है।

उत्तराखंड के पर्वतीय इलाकों में खेती की परिस्थितियां मैदानी क्षेत्रों से अलग हैं। कई स्थानों पर किसान सिंचाई के बजाय बारिश पर निर्भर रहते हैं। ऐसे में सरकार ने अनुपूरक बजट में मौसम के बदलाव के अनुसार खेती की व्यवस्था बेहतर बनाने वाली परियोजनाओं को भी शामिल किया है।

बारिश पर निर्भर खेती के लिए 70 करोड़ रुपये

उत्तराखंड जलवायु अनुकूल बारानी कृषि परियोजना के लिए 70 करोड़ रुपये प्रस्तावित किए गए हैं। जायका के सहयोग से जुड़ी इस परियोजना का उद्देश्य उन क्षेत्रों में खेती को बेहतर बनाना है, जहां सिंचाई के पर्याप्त साधन नहीं हैं और फसलें मुख्य रूप से बारिश के पानी पर निर्भर रहती हैं।

इस परियोजना के जरिए मौसम की बदलती परिस्थितियों के अनुसार कृषि गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाएगा। पहाड़ी इलाकों में खेती को लंबे समय तक बनाए रखने और किसानों की आजीविका को मजबूत करने के लिहाज से इस योजना को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

किसानों को फसल बेचने के साथ कारोबार का भी मिलेगा अवसर

कृषि उत्पादों के बेहतर इस्तेमाल और उनसे जुड़े छोटे कारोबार को बढ़ावा देने के लिए प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम उन्नयन योजना (PMFME) के तहत लगभग 35 करोड़ रुपये रखे गए हैं।

इस योजना का संबंध कृषि उपज से खाद्य उत्पाद तैयार करने वाले छोटे उद्यमों से है। इसके जरिए किसानों और ग्रामीण उद्यमियों को केवल कच्ची फसल बेचने तक सीमित रहने के बजाय उससे तैयार उत्पादों के कारोबार की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर मिल सकता है।

वहीं, सहकारिता के जरिए किसानों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने के लिए दीनदयाल उपाध्याय सहकारिता किसान कल्याण योजना में 20 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। किसान पेंशन योजना के लिए भी 9 करोड़ रुपये प्रस्तावित किए गए हैं।

ट्राउट मछली पालन के लिए 28 करोड़, मधुमक्खी पालन को भी बढ़ावा

खेती के अलावा पहाड़ी क्षेत्रों में आय के दूसरे साधन विकसित करने पर भी ध्यान दिया गया है। अनुपूरक बजट में ट्राउट प्रोत्साहन योजना के लिए लगभग 28 करोड़ रुपये रखे गए हैं। ट्राउट मछली पालन पहाड़ी क्षेत्रों में आजीविका का एक विकल्प है और इस प्रावधान से इससे जुड़ी गतिविधियों को बढ़ावा देने की योजना है।

इसके साथ ही नई मौन पालन नीति के लिए एक करोड़ रुपये प्रस्तावित किए गए हैं। मौन पालन यानी मधुमक्खी पालन के जरिए शहद उत्पादन और उससे जुड़ी गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाएगा। ग्रामीण क्षेत्रों में खेती के साथ मधुमक्खी पालन किसानों के लिए अतिरिक्त कमाई का साधन बन सकता है।

पशुओं के संरक्षण से जुड़ी व्यवस्था के लिए भी बजट में राशि रखी गई है। गौ सदनों के निर्माण के लिए लगभग 9 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

फसल खरीद से लेकर छोटे उद्यमों तक सरकार का फोकस

अनुपूरक बजट में कृषि क्षेत्र के लिए रखी गई राशि को दो प्रमुख जरूरतों से जोड़ा गया है। पहली, किसानों से धान और गेहूं की खरीद के लिए वित्तीय व्यवस्था उपलब्ध कराना और दूसरी, खेती के साथ दूसरे रोजगार और कारोबार के अवसर बढ़ाना।

इसी वजह से फसल खरीद के बड़े प्रावधान के साथ खाद्य प्रसंस्करण, सहकारिता, मत्स्य पालन और मधुमक्खी पालन जैसी योजनाओं को भी जगह दी गई है। प्रस्तावित राशि को विधानसभा की मंजूरी मिलने के बाद संबंधित योजनाओं के लिए उपलब्ध कराया जा सकेगा।