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“पत्नी यदि ठान ले तो ईश्वर को उसके आगे झुकना ही पड़ता है” इस बात को साबित किया प्रयागराज कि विद्योतमा सिंह ने, पढ़ें ख़बर

Written by:Shyam Dwivedi
Published:
पत्नी यदि ठान ले तो ईश्वर को उसके आगे झुकना ही पड़ता है। इसी कहावत को सच करके दिखाया है प्रयागराज की विद्योत्तमा सिंह ने। प्रयागराज की विद्योत्तमा सिंह ने अपनी पति की नौकरी के लिए चित्रकूट में भगवान कामतानाथ से मन्नत मांगी। लगातार प्रयास से उनकी मन्नत पूरी हो गई जिसके बाद विद्योत्तमा सिंह अपने पति के लिए चित्रकूट में विशाल कामदगिरि पर्वत की परिक्रमा की। चलिए विस्तार से जानते हैं उनकी इस कहानी के बारे में..
“पत्नी यदि ठान ले तो ईश्वर को उसके आगे झुकना ही पड़ता है” इस बात को साबित किया प्रयागराज कि विद्योतमा सिंह ने, पढ़ें ख़बर

नौकरी, कारोबार या अपने कार्यों में सफलता पाने के लिए लोग भगवान से मन्नतें मांगते हैं एवं जब उनका कार्य सफल हो जाता है तो लोग मन्नत को निभाते भी हैं। यहां तक तो पत्नी अपने पति के लिए ऐसे कई व्रत तक रखती हैं कि उनकी मनोकामना पूर्ण हो जाए। वे मंदिरों में मन्नतें मांगती हैं। इस बीच, ऐसी ही एक कहानी प्रयागराज की विद्योत्तमा सिंह की है जो अपने पति की नौकरी के लिए चित्रकूट में विशाल कामदगिरि पर्वत की परिक्रमा कर रही हैं। चलिए जानते हैं उनकी पूरी कहानी के बारे में..

कहते हैं कि अगर पत्नी ठान ले तो ईश्वर को उसके आगे झुकना ही पड़ता है। ठीक ऐसा ही प्रयागराज की विद्योत्तमा सिंह के साथ देखने को ​मिला। भगवान ने उनकी आस्था को झुकने नहीं दिया। प्रयागराज की विद्योत्तमा सिंह अपने पति के लिए चित्रकूट में विशाल कामदगिरि पर्वत की परिक्रमा कर रही हैं। यह परिक्रमा चलते हुए नहीं लेटकर कर रही हैं। 2019 में जब विद्योत्तमा ने ईश्वर से मन्नत मांगी और जब आज वह पूरी वह तो मन्नत पूरी करने के लिए परिक्रमा करने निकल पड़ी।

विद्योत्तमा सिंह ने पति के लिए मांगी मन्नत को उजागर करते हुए बताया कि 2012 में उनकी शादी श्याम नंदन सिंह पटेल से हुई थी। 2014 यानि दो साल बाद ही उनको संतान की प्राप्ति हो गई। उनके पति एमए-बीएड करने के बाद भी बेरोजगार थे और नौकरी की तलाश में सिर्फ हताशा ही मिलती थी। ऐसे में घर का खर्च कैसे चलता। उनके पति सरकारी नौकरी की प​रीक्षाओं में कभी 1 नंबर से तो कभी 2 नंबर चूक जाते थे।

पति को सफलता न मिल पाने के लिए बाद विद्योत्तमा 2019 में चित्रकूट धाम पहुंची जहां उन्होंने सच्चे मन से भगवान कामतानाथ दर्शन कर मन्नत मांगी कि अगर पति की नौकरी लग जाएगी, तो मैं कामदगिरि पर्वत की तीन बार लेटकर परिक्रमा करूंगी। जिसके बाद भगवान कामतानाथ ने भक्त की आस्था को झुकने नहीं दिया एवं विद्योत्तमा के पति 2021 में टीजीटी के जरिए टीचर बन गए। जिसके बाद विद्योत्तमा अपनी मन्नत पूरी करने के लिए निकल पड़ी। बता दें कि विद्योत्तमा एक बार पहले परिक्रमा कर चुकी हैं और अब वह दूसरी बार परिक्रमा करने चित्रकूट भगवान कामतानाथ जी के धाम आई हैं।