आगर-मालवा में सावन के अंतिम सोमवार का दिन इस बार बेहद खास होने वाला है। बाबा बैजनाथ महादेव की राजसी सवारी को लेकर शहर में तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी हैं।
24 अगस्त को निकलने वाली इस सवारी में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है। अनुमान है कि करीब सवा लाख लोग बाबा के दर्शन और राजसी सवारी में शामिल होने के लिए आगर पहुंचेंगे। मंदिर से लेकर शहर की सड़कों तक माहौल शिवमय नजर आने वाला है।
बाबा बैजनाथ की 48वीं राजसी सवारी आज
सावन के आखिरी सोमवार को बाबा बैजनाथ महादेव की राजसी सवारी निकलना आगर-मालवा की पुरानी धार्मिक परंपरा का हिस्सा है। इस बार यह 48वीं वार्षिक राजसी सवारी है। सवारी को लेकर मंदिर और प्रशासन की ओर से कई स्तर पर तैयारियां की गई हैं।
बाबा की एक झलक पाने के लिए आसपास के गांवों और दूसरे इलाकों से भी श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है। ऐसे में शहर में भीड़ बढ़ने के साथ दर्शन, भोजन, पानी और अन्य जरूरी सुविधाओं पर खास ध्यान दिया जा रहा है।
एक लाख लोगों के लिए बन रही प्रसादी
बाबा बैजनाथ की राजसी सवारी में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए सबसे बड़ी व्यवस्था भोजन प्रसादी की है। पुरानी कृषि उपज मंडी परिसर में करीब एक लाख लोगों के लिए प्रसादी तैयार की जा रही है।
मंडी परिसर में एक दर्जन से ज्यादा भट्टियां लगाई गई हैं। इन पर लगातार खाना बनाने का काम चल रहा है। करीब 150 हलवाई इस पूरी व्यवस्था में लगे हैं। कहीं पूरियों के लिए आटा तैयार हो रहा है तो कहीं सब्जी के लिए बड़ी-बड़ी कड़ाहियां तैयार की जा रही हैं।
65 क्विंटल आटा और 70 क्विंटल कद्दू से तैयार होगी प्रसादी
एक लाख श्रद्धालुओं की प्रसादी के लिए इस बार बड़ी मात्रा में खाद्य सामग्री जुटाई गई है। व्यवस्था के अनुसार करीब 65 क्विंटल आटा और 70 क्विंटल कद्दू की जरूरत होगी।
इसके अलावा करीब 20 क्विंटल बेसन और 25 क्विंटल शक्कर भी इस्तेमाल की जाएगी। भट्टियों को लगातार जलाए रखने के लिए करीब 250 क्विंटल लकड़ी की व्यवस्था की गई है।
सरकारी फंड के बजाय श्रद्धालुओं के सहयोग से चलती है प्रसादी व्यवस्था
इस विशाल प्रसादी व्यवस्था की सबसे खास बात श्रद्धालुओं का सहयोग है। बताया गया है कि एक लाख लोगों की भोजन व्यवस्था के लिए सरकारी फंड पर निर्भरता नहीं रखी जाती।
श्रद्धालु अपनी श्रद्धा के अनुसार खाद्य सामग्री और दूसरी चीजों का सहयोग करते हैं। कई लोग आटा, तेल, शक्कर, अनाज और अन्य जरूरी सामग्री उपलब्ध कराते हैं। कुछ श्रद्धालु नगद राशि देकर भी इस सेवा में योगदान देते हैं।
बारिश और धूप से बचने के लिए वाटरप्रूफ टेंट की व्यवस्था
सावन का अंतिम सोमवार होने के कारण मौसम भी इस आयोजन में बड़ी भूमिका निभा सकता है। बारिश के बीच बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना को देखते हुए प्रसादी स्थल पर विशेष व्यवस्था की गई है।
पुरानी कृषि उपज मंडी में वाटरप्रूफ टेंट लगाए गए हैं। इसका उद्देश्य यह है कि बारिश होने पर भी श्रद्धालुओं को भोजन करने में परेशानी न हो। तेज धूप होने पर भी टेंट के अंदर बैठकर लोग प्रसादी ग्रहण कर सकेंगे।
करीब एक हजार साल पुराना माना जाता है बाबा बैजनाथ मंदिर
आगर-मालवा का बाबा बैजनाथ महादेव मंदिर केवल धार्मिक आस्था का केंद्र नहीं है, बल्कि इसके साथ इतिहास और कई पुरानी मान्यताएं भी जुड़ी हुई हैं। मंदिर की प्राचीनता करीब एक हजार साल पुरानी मानी जाती है। मंदिर के सामने स्थित सती के ओटले पर एक शिलालेख मौजूद है, जिस पर 1116 अंक दिखाई देता है। इसी आधार पर मंदिर की प्राचीनता को लेकर इतिहास से जुड़ी मान्यताएं सामने आती हैं।
कर्नल मार्टिन की कहानी भी मंदिर से जुड़ी है
बाबा बैजनाथ मंदिर से जुड़ी कर्नल मार्टिन की कहानी भी स्थानीय स्तर पर काफी प्रसिद्ध है। इस कहानी का संबंध ब्रिटिश काल से बताया जाता है। किवदंती के अनुसार वर्ष 1880 में अंग्रेज कर्नल मार्टिन युद्ध के लिए गए थे। काफी समय तक उनकी कोई खबर नहीं मिली। इस दौरान उनकी पत्नी बाबा बैजनाथ मंदिर पहुंचीं और अपने पति की सुरक्षित वापसी के लिए बाबा से प्रार्थना की।
मंदिर परिसर में शिव-पार्वती के साथ कई धार्मिक स्थल
बाबा बैजनाथ मंदिर परिसर में मुख्य शिव मंदिर के अलावा कई दूसरे धार्मिक स्थल भी हैं। मुख्य गर्भगृह में शिव-पार्वती की प्रतिमा स्थापित है। परिसर में अखंड ज्योति जलाने की परंपरा भी बताई जाती है। मंदिर के उत्तरी हिस्से में गणेश मंदिर है। इसके सामने वराह भगवान का प्राचीन मंदिर भी मौजूद है।
वराह भगवान की प्रतिमा भी श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र है। इससे मंदिर परिसर केवल एक शिव मंदिर तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यहां कई धार्मिक परंपराएं एक साथ दिखाई देती हैं।
राजसी सवारी में दिखेगा आस्था
बाबा बैजनाथ की राजसी सवारी के दौरान आगर शहर में धार्मिक माहौल देखने को मिलेगा। श्रद्धालु बाबा की एक झलक पाने के लिए घंटों इंतजार करते हैं। किसी के लिए यह बाबा के दर्शन का मौका है, किसी के लिए सवारी में शामिल होने की इच्छा और किसी के लिए सेवा करने का अवसर। यही वजह है कि इस आयोजन में अलग-अलग रूपों में लोगों की भागीदारी दिखाई देती है।
एक तरफ मंदिर में पूजा और दर्शन की तैयारियां हैं, दूसरी तरफ मंडी में एक लाख लोगों के भोजन की तैयारी चल रही है। कहीं सेवादार व्यवस्था संभाल रहे हैं तो कहीं हलवाई प्रसादी तैयार कर रहे हैं। इस पूरी तस्वीर में आस्था के साथ सामूहिक सहयोग भी नजर आता है।






