सोयाबीन की सही कीमत नहीं मिलने से फूटा किसानों का गुस्सा, हाईवे पर किया चक्का जाम, सरकार से की ये मांग

भावांतर योजना के लिए निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार प्रदेश में ई-उपार्जन पोर्टल पर पंजीयन का कार्य 3 अक्टूबर से प्रारंभ हो गया है जो 25 अक्टूबर 2025 तक चलेगा। भावांतर की अवधि 01 नवम्बर से 2025 से 31 जनवरी 2026 तक रहेगी।
Agar Malwa farmers blockade

आगर मालवा जिले में सोयाबीन की फसल का सही दाम नहीं मिलने से नाराज किसानों ने आज नेशनल हाईवे पर चक्काजाम कर दिया। जिला मुख्यालय के छावनी चौराहे पर किसानों ने सड़क पर बैठकर प्रदर्शन किया, जिससे करीब एक घंटे तक यातायात प्रभावित रहा।

आक्रोशित किसानों के मुताबिक आगर कृषि उपज मंडी में किसानों को सोयाबीन का दाम मात्र 2700 से 3000 रुपए प्रति क्विंटल तक मिल रहा है जो न्यूनतम समर्थन मूल्य 5328 से बहुत कम है। कम दाम से नाराज किसानों ने पहले मंडी में प्रदर्शन किया और मंडी गेट पर ताला जड़ दिया। बाद में नारेबाजी करते हुए किसान छावनी नाका चौराहे पहुंचे और अपने ट्रैक्टर-ट्रॉली खड़े कर नेशनल हाईवे-52 पर चक्काजाम कर दिया।

किसान की मांग मंडी में ही तत्काल दे दे जाए भावान्तर योजना की राशि 

किसानों का कहना है कि अतिवृष्टि और पीला मोज़ेक वायरस से फसल पहले ही खराब हो चुकी है, ऊपर से मंडी में कम भाव मिलने से अब उनकी लागत भी नहीं निकल पा रही। किसानों ने सवाल उठाया कि जब भावांतर योजना में सरकार भाव का अंतर देती है, तो वह राशि मंडी में ही क्यों नहीं दे रही जिससे उन्हें तुरंत राहत मिल सके।

किसान बोले पहले मौसम ने मारा और अब व्यापारी और सरकार मार रहे 

चक्काजाम की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे। एडिशनल एसपी, एसडीएम, तहसीलदार और थाना प्रभारी ने किसानों से चर्चा की। आक्रोशित किसानों ने कहा कि हमें तो पहले ही मौसम ने पीला मोजेक ने मार दिया अब व्यापारी मार रहा है, सरकार भी बड़ी बड़ी बातें करती है, अरे 2500, 2700 में सोयाबीन खरीद रहे हैं जबकि भाव 5328 रुपये प्रति क्विंटल है, किसान बोले भावांतर में भी नियम बनाये है जिनकी फसल उतनी नहीं बिकी तो वो किसान तो पूरी तरह बर्बाद हो जायेगा

प्रशासन की समझाइश के बाद हाइवे से हटे किसान, दी आंदोलन की चेतावनी 

समझाइश के बाद किसानों ने जाम खत्म किया। इस दौरान हाईवे पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा। फिलहाल स्थिति सामान्य हो गई है, लेकिन किसानों ने चेतावनी दी है कि अगर फसलों का उचित मूल्य नहीं मिला तो वे आने वाले दिनों में बड़ा आंदोलन करेंगे।

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आगर मालवा से गौरव सरवारिया की रिपोर्ट

Atul Saxena
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पत्रकारिता में तीन दशक से अधिक का अनुभव.

पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं .... View all posts by Atul Saxena →
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