पिकअप-बाइक की भिड़ंत में 2 दोस्त जिंदा जले, मदद की बजाय वीडियो बनाते रहे लोग

पिकअप-बाइक की भिड़ंत में 2 दोस्त जिंदा जले, मदद की बजाय वीडियो बनाते रहे लोग

अनूपपुर।
मध्यप्रदेश के अनूपपुर जिले में शुक्रवार देर शाम को बड़ा हादसा हो गया । यहां एक बाइक और पिकअप की जोरदार भिड़ंत हो गई। टक्कर इतनी भीषण थी कि बाइक में आग लग गई और दोनों जिंदा जल गई।हैरानी की बात तो ये है कि आग लगने के बाद एक युवक जब जान बचाने के लिए भागता तो मौके पर मौजूद लोग उन्हें बचाने की बजाय वीडियो बनाते रहे।जो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।इधर पुलिस मामले की जांच कर रही है।

दरअसल, घटना जिले के सिंदूरी गांव की देर शाम की है।यहां दो दोस्त आयुष्मन और आयुष बाइक से कही जा रहे थे तभी छुलहा फाटक के पास उनकी बाइक एक पिकअप से भिड़ गई।टक्कर इतनी भीषण थी कि बाइक में आग लग गई और फिर आशीष बाइक छोड़कर जान बचाने के लिए यहां-वहां भागने लगा, लेकिन कुछ दूर जाकर वह सड़क किनारे गिर गया। इधर बाइक में ही फंसने के कारण आयुष्मान उसी में जलता रहा। हादसे के बाद मौके पर लोगों की भीड़ जमा हो गई लेकिन उन्हें बचाने की बजाय लोग खडे होकर वीडियो बनाते रहे लेकिन कोई मदद के लिए आगे नही आया। जब चीख पुकार तेज हुई तो कुछ लोगों ने आग बुझाने के प्रयास शुरू किए, लेकिन तब तक दोनों पूरी तरह जल चुके थे और उनकी मौके पर ही मौत हो गई।घटना के बाद गांव में मातम पसर गया है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।वही पुलिस मामले की जांच में जुटी है, वीडियो के आधार पर लोगों की पहचान की जा रहीहै।

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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