DJ वाले बाबुओं की अब खैर नहीं, एसडीएम ने दिए ये निर्देश

DJ वाले बाबुओं की अब खैर नहीं, एसडीएम ने दिए ये निर्देश

अशोकनगर। अशोकनगर शहर में तेज आवाज में बजने वाले डीजे को लेकर बीते कुछ दिनों से लगातार विरोध के स्वर उठने लगे हैं। हाल ही में शहर के मैरिज गार्डन संचालकों ने रात 10 बजे के बाद बजने बालो डीजे को बेन करने का फैसला लिया था। एसडीएम ने मानक स्तर से ज्यादा आवाज में डीजे बजाने वाले लोगों को आगाह करते हुए पत्र जारी कर दिया है।

उल्लेखनीय है कि अशोकनगर शहर में कुछ डीजे वाले 80 डेसीबेंट की जगह 400 डेसीवेंट तक की आवाज में डीजे बजाते हैं। इनकी इस आवाज से कई सारे लोगों को दिक्कत है। हार्ट के पेशेंटो को इससे भारी परेशानी हो रही। शहर के एक समाजसेवी हैंडल गुरु की मौत का एक कारण तेज डीजे सामने आने के बाद शहर में तेज आवाज में बजने बाले डीजे के खिलाफ लोग मुखर होने लगे थे। लोगों के विरोध के कारण बीते दिनों शहर के मैरिज गार्डन संचालकों ने यह फैसला लिया था कि रात10:00 बजे के बाद कहीं भी अगर कोई डीजे चलता है, तो उसे मैरिज गार्डनो में बैन कर दिया जाएगा।

एसडीएम ने जारी की चेतावनी अशोकनगर एसडीएम सुरेश जादव ने आज एक पत्र जारी करके मैरिज गार्डन, बैंड एवं डीजे संचालजो को चेतावनी जारी की है कि मध्यप्रदेश कोलाहल नियंत्रण अधिनियम के मानकों के अनुसार अगर तेज आवाज में डीजे चलाए गए तो उन पर कार्रवाई की जाएगी। उ पत्र में उन्होंने लिखा है कि तेज आवाज में डीजे चलाने की शिकायत मिल रही है ,साथ ही परीक्षाओं के समय में बच्चों को इनकी आवाज से परेशानी हो रही है। पत्र में लिखा है कि ध्वनि विस्तारक यंत्र मानक स्तर पर चलाए जाएं अन्यथा इन पर कठोर कार्रवाई की जाएगी।

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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