घर लौट रहे मजदूरों के लिये मेडिकल चेकअप की व्यवस्था नहीं, चेकपोस्ट पर पुलिस कर रही सहायता

घर लौट रहे मजदूरों के लिये मेडिकल चेकअप की व्यवस्था नहीं, चेकपोस्ट पर पुलिस कर रही सहायता

अशोकनगर मुंगावली। अलीम डायर।

बाहर से काम करने आए क्षेत्र में मजदूर लाॅकडाउन के दौरान कई जगहों पर फस गए हैं ऐसे में जब लाॅकडाउन के दौरान ट्रेनें और बसें सभी बंद है तो मजबूरन यह मजदूर पैदल ही अपने घरों की ओर चल दिए। इसी दौरान नगर में एवं नगर की सीमाओं पर बने चेक पोस्ट पर पुलिस कर्मियों समाजसेवियों द्वारा पैदल जा रहे मजदूरों की भरपूर सहायता की जा रही है इन्हें खाने पीने की व्यवस्था की जा रही है तो वही दूसरे जिलों की सीमाओं में छोड़ने के लिए वाहनों की भी व्यवस्था भी की जा रही है।

यहां तक तो ठीक है वहीं दूसरी ओर प्रशासन की एक कमी भी देखी जा रही है वह यह कि जिस कोरोना वायरस से बचने के लिए संपूर्ण भारतवर्ष को 21 दिन के लिए लॉकडाउन किया गया है हर कहीं जगह-जगह एक एक व्यक्ति का मेडिकल चेकअप किया जा रहा है। लेकिन यहां मुंगावली सीमा से सटे सेमर खेड़ी चेक पोस्ट पर लोगों के चेक करने के लिए कोई मेडिकल व्यवस्था नहीं है ना ही कोई मेडिसन सुविधा उपलब्ध है और ना ही कोई थर्मामीटर है जिससे नगर की सीमा में आने जाने वाले लोगों को चेक किया जा सके। इसके अभाव में यदि इस दौरान कोई संक्रमित व्यक्ति क्षेत्र में प्रवेश कर जाता है तो वह संपूर्ण क्षेत्र के लिए खतरा उत्पन्न कर सकता है। यह प्रशासन की एक बहुत बड़ी चूक है अगर जल्द ही प्रशासन ने इसको संज्ञान में लेते हुए अमल नहीं किया तो कोई भी संक्रमित व्यक्ति नगर में प्रवेश कर सकता है जिसका परिणाम संपूर्ण क्षेत्र वासियों को भुगतना पड़ सकता है।

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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