सरकार को महाराज का संदेश “वादा किया तो निभाना पड़ेगा”

सरकार को महाराज का संदेश “वादा किया तो निभाना पड़ेगा”

हितेंद्र बुधौलिया/अशोकनगर। कांग्रेस के पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं राष्ट्रीय महासचिव ज्योतिरादित्य सिंधिया एक दिन के दौरे पर अशोकनगर पहुंचे, इस दौरान उन्होंने जनसंपर्क कार्यक्रम किया। यहां मीडिया से मुखातिब होते हुए सिंधिया ने सरकार के खिलाफ सड़क पर उतरने के बयान पर अपना रुख स्पष्ट किया। श्री सिंधिया ने कहा कि सरकार ने आश्वासन दिया था अब इन बातों पर अमल होना चाहिए और अगर अमल नहीं होता तो सड़क पर उतरेंगे। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि वह 20 साल से राजनीति कर रहा है और ऐसा कभी नहीं हुआ कि उन्होंने कोई वादा किया हो और उसे निभाया ना हो। इस तरह कल सड़क पर सरकार के खिलाफ उतरने के बयान पर सिंधिया बिना लाग लपेट के स्थिर बने रहे।

शुक्रवार को अशोकनगर में हुये ऐतिहासिक स्वागत के बीच लोकसभा चुनाव में हार की टीस भी सिंधिया के बयानों में खुलकर सामने आई। मंच से बोलते हुए सिंधिया ने कहा कि जनता ही भगवान होती है ,वह आम आदमी को नेता बना देती है और नेता को जनता बना देती है। श्री सिंधिया ने यह भी कहा कि हम कुछ अतिआत्मविश्वास में रहे इस कारण यह परिणाम हुआ। हालांकि सिंधिया यह कहना भी नहीं भूले कि भले ही अब संसद में नहीं है मगर इस क्षेत्र से उनका लगाव बना हुआ है और वे हमेशा यहां के लोगों की सेवा करते थे और आगे भी करते रहेंगे।

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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