Gajkesari Rajyog 2025: ज्योतिष शास्त्र में देवताओं के गुरू बृहस्पति व मन के कारक चन्द्रमा की भूमिका बेहद अहम मानी जाती है।देवगुरू बृहस्पति हर 13 महीने में राशि बदलते है, जबकी चंद्रमा को सबसे तेज गति से चलने वाला ग्रह माना जाता हैं ,वे हर ढाई दिन में चाल बदलते हैं,ऐसे में वे किसी ने किसी राशि के साथ मिलकर योग राजयोग का निर्माण करते है। इसी क्रम में पितृपक्ष में चन्द्र गुरू की युति से गजकेसरी राजयोग बनने जा रहा है। ज्योतिष के मुताबिक, 14 सितंबर को मन के कारक चन्द्रमा मिथुन राशि में गोचर करने जा रहे है, जहां पहले से ही ज्ञान, बुद्धि, धर्म, भाग्य और संतान के कारक गुरू विराजमान है ऐसे में ग्रहों के राजकुमार बुध की राशि में चन्द्र व गुरू की युति से गजकेसरी राजयोग बनेगा जिसका प्रभाव 16 सितंबर तक बना रहेगा।
गजकेसरी राजयोग का राशियों पर प्रभाव
कन्या राशि : गजकेसरी राजयोग का जातकों को विशेष लाभ मिल सकता है। पिता के साथ संंबंध मजबूत रहेंगे।आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। बेरोजगार को नौकरी के अवसर मिल सकते है। लेखन, शिक्षण, या मीडिया से जुड़े लोगों को विशेष लाभ की प्राप्ति हो सकती है।इस अवधि में यात्राएं कर सकते है। व्यापार में मुनाफा और नई डील मिल सकती है। नौकरीपेशा को नई जॉब का प्रस्ताव या प्रमोशन की सौगात मिल सकती है।
वृषभ राशि: गजकेसरी राजयोग जातकों के लिए लाभकारी साबित हो सकता है। समय- समय पर आकस्मिक धनलाभ की प्राप्ति हो सकती है।आर्थिक स्थिति अच्छी रहेगी। वैवाहित जीवन शानदार रहने वाला है।लंबे समय से सोची हुई योजनाएंं सफल हो सकती है। व्यापारियों को अटका और रूका धन वापस मिल सकता है।
सिंह राशि: गजकेसरी राजयोग जातकों के लिए वरदान से कम साबित नहीं होगा। आय में जबरदस्त इजाफा हो सकता है, नए नए माध्यम खुलेंगे। नौकरीपेशा को पदोन्नति, वेतनवृद्धि के अलावा नया प्रोजेक्ट मिल सकता है। छात्रों को विदेश में पढ़ाई करने का मौका मिल सकता है। निवेश से लाभ प्राप्त कर सकते है। शेयर बाजार, सट्टा और लॉटरी से लाभ मिल सकता है।
कब बनता है कुंडली में गजकेसरी राजयोग
- ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, गजकेसरी योग मतलब हाथी के ऊपर सवार सिंह। इस योग में चंद्रमा की युति गुरु, बुध और शुक्र के साथ होती है।अगर चंद्रमा ,गुरु, बुध और शुक्र में से किसी एक से भी केंद्र में हो तो गजकेसरी योग का निर्माण जातक की कुंडली में होता है ।
- अगर किसी जातक की कुंडली के लग्न,चौथे और दसवें भाव में गुरु-चंद्र साथ हो तो इस योग का निर्माण होता है।यदि चंद्र या गुरु में से कोई भी एक दूसरे के साथ उच्च राशि में हो तो भी गजकेसरी योग बनता है।
(Disclaimer : यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों और जानकारियों पर आधारित है, MP BREAKING NEWS किसी भी तरह की मान्यता-जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। हमारा उद्देश्य महज सूचना पहुंचाना है।इसके सही और सिद्ध होने की प्रामाणिकता नहीं दे सकते हैं। इन पर अमल लाने से पहले अपने ज्योतिषाचार्य या पंडित से संपर्क करें)






