ज्योतिष में ग्रहों, कुंडली और नक्षत्रों का बड़ा महत्व माना जाता है। हर ग्रह एक निश्चित समय अंतराल के बाद राशि बदलता है, जिससे एक राशि में एक से अधिक ग्रहों के आने से विशेष योग व राजयोग बनते हैं। मार्च की तरह अप्रैल में भी ग्रहों का महागोचर होने वाला है। इस महीने में सूर्य, शुक्र, चंद्रमा और बुध चाल बदलेंगे। इसमें सबसे खास ग्रहों के राजकुमार का राशि परिवर्तन है । बुध बुद्धि, ज्ञान, व्यापार, शिक्षा के कारक माने जाते है। बुध कन्या राशि में उच्च तो मीन राशि में नीच के होते हैं। वर्तमान में बुध कुंभ राशि में विराजमान है और 11 अप्रैल 2026 को अपनी नीच राशि मीन में प्रवेश करेंगे, जिससे नीचभंग राजयोग का निर्माण होगा, जो 3 राशियों के लिए लकी साबित हो सकता है।

नीचभंग राजयोग 2026 : 3 राशियों को मिलेगा विशेष लाभ

वृषभ राशि पर प्रभाव : नीचभंग राजयोग जातकों के लिए बेहद फलदायी साबित हो सकता है। समाज में मान-सम्मान बढ़ने की प्रबल संभावना है। लंबे समय से अटके व रुके हुए काम पूरे हो सकते हैं। आर्थिक स्थिति में मजबूती आ सकती है। व्यापारियों को मुनाफा मिल सकता है। इस अवधि में कोई नया सौदा मिल सकता है। नौकरीपेशा लोगों को भी नए मौके मिल सकते हैं। लव लाइफ शानदार रहने वाली है।

मिथुन राशि पर प्रभाव : नीचभंग राजयोग जातकों के लिए लकी साबित हो सकता है। शादीशुदा जीवन शानदार रहेगा।  जीवनसाथी की तरक्की हो सकती है। आय में वृद्धि के साथ नए नए स्त्रोत खुल सकते हैं। कारोबार में सफलता मिल सकती है। करियर में नए अवसर मिल सकते हैं। पुराने विवाद खत्म हो सकते हैं। इस अवधि में संपत्ति या वाहन से जुड़े काम पूरे हो सकते हैं। पैतृक संपत्ति से लाभ होने के संकेत हैं।

मीन राशि पर प्रभाव : नीचभंग राजयोग जातकों के लिए लकी साबित हो सकता है। भौतिक सुख- सुविधाओं में वृद्धि हो सकती है। परिवार के साथ चली आ रही समस्याएं समाप्त हो सकती है। साहस और आत्मविश्वास में वृद्धि हो सकती है। समाज में मान-सम्मान बढ़ने के प्रबल योग हैं । पुराने निवेश से भी अच्छा लाभ मिल सकता है। विदेश में नौकरी पाने का सपना पूरा हो सकता है। अविवाहितों के लिए शादी के प्रस्ताव आ सकते है।

कब बनता है Neech bhang Rajyog

  • ज्योतिष के मुताबिक, यदि किसी कुंडली में एक उच्च ग्रह के साथ एक नीच ग्रह रखा जाता है, तो कुंडली में नीचभंग राजयोग बनता है।
  • यदि किसी कुंडली में कोई ग्रह अपनी नीच राशि में बैठा हो और उस राशि का स्वामी लग्न भाव या चंद्रमा से केंद्र स्थान में हो तो कुंडली में नीचभंग राजयोग बनता है।
  • यदि किसी कुंडली में कोई ग्रह अपनी नीच राशि में हो और उस राशि में उच्च होने वाला ग्रह चंद्रमा से केंद्र स्थान में हो तो नीचभंग राजयोग बनता है।
  • यदि किसी कुंडली में किसी ग्रह की नीच राशि का स्वामी और उसकी उच्च राशि का स्वामी परस्पर केंद्र स्थान में हो तो नीचभंग राजयोग बनता है।

(डिस्क्लेमर: यह जानकारी सामान्य वैदिक ज्योतिष मान्यताओं/पंचांग-आधारित गोचर गणना पर तैयार की गई है। व्यक्ति-विशेष पर परिणाम जन्मकुंडली, लग्न और दशा पर निर्भर करते हैं। MP Breaking News किसी भी भविष्यवाणी/दावे की गारंटी नहीं देता है। हमारा उद्देश्य महज सूचना पहुंचाना है। इन पर अमल लाने से पहले अपने ज्योतिषाचार्य या पंडित से संपर्क करें)