सितंबर महीने में सूर्य और चन्द्र ग्रहण लगने वाला है। साल का पहला चन्द्र ग्रहण 14 मार्च और सूर्य ग्रहण 29 मार्च को लगा था।हालांकि यह दोनों ग्रहण भारत में दिखाई नहीं दिए और ना ही इनका सूतक काल मान्य हुआ ।अब साल का दूसरा सूर्य व चन्द्र ग्रहण सितंबर में लगने जा रहा है।हालांकि सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा लेकिन चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई देगा ऐसे में सूतक काल भी मान्य होगा।खास बात ये है कि इस बार पितृपक्ष की शुरुआत 7 सितंबर और समापन 21 सितंबर को होगा, ऐसे में पितृपक्ष में ग्रहण लगने का बड़ा महत्व माना जा रहा है।इस दौरान न्यायप्रदाता और कर्मफलदाता शनि भी मीन राशि में वक्री होंगे, जिससे राशियों पर भी बड़ा असर देखने को मिलेगा। आईए जानते है सितंबर में लगने वाले ग्रहण के समय, तारीख और सूतककाल के साथ धार्मिक महत्व के बारें में…………
7 सितंबर को साल का दूसरा चन्द्र ग्रहण
ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक, साल का दूसरा चंद्र ग्रहण 7 सितंबर को भाद्रपद्र की पूर्णिमा को लगेगा। भारतीय समयानुसार ग्रहण 7 सितंबर को 9:57 मिनट से 8 सितंबर की रात 1:26 मिनट तक रहेगा।इसका सूतककाल दोपहर 12 बजकर 35 मिनट पर शुरू हो जाएगा। चुंकी चन्द्र ग्रहण में सूतक काल ग्रहण शुरू होने से 9 घंटे पहले लग जाता है। भारत के साथ ही फ्रांस, इग्लैंड,जर्मनी, इटली, ऑस्ट्रेलिया, यूरोप, न्यूजीलैंड, अमेरिका और अफ्रीका पर भी देखाई देगा। यह ग्रहण शनि की राशि कुंभ और पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र में घटित होगाा।इस दौरान राहु चंद्रमा भी कुंभ में रहेंगे।
21 सितंबर को साल का दूसरा सूर्य ग्रहण
साल का दूसरा सूर्य ग्रहण 21 सितंबर 2025 सर्वपितृ अमावस्या को लगेगा। यह एक आंशिक सूर्य ग्रहण होगा जो 21 सितंबर को रात 11 बजे से शुरू होकर 22 सितंबर को सुबह 3 बजकर 24 मिनट तक रहेगा, ऐसे में यह ग्रहण भारत में नहीं दिखाई देगा और ना ही इसका सूतक काल मान्य होगा।यह सूर्य ग्रहण कन्या राशि में पितृपक्ष में लगने वाला है।यह सूर्य ग्रहण भारत को छोड़कर न्यूजीलैंड, फिजी, ऑस्ट्रेलिया, अंटार्कटिका, प्रशांत महासागर, अटलांटिक महासागर में दिखेगा।यह ग्रहण भारत में इसलिए नहीं दिखेगा, क्योंकि ग्रहण की अवधि के दौरान भारत में रात होगी और इसका सूतक भी मान्य नहीं होगा।
जानिए कब लगता है चन्द्र ग्रहण?
चंद्र ग्रहण के दौरान सूर्य की परिक्रमा के दौरान पृथ्वी, चांद और सूर्य के बीच आ जाती है, इस दौरान चांद धरती की छाया से पूरी तरह से छुप जाता है। आंशिक चंद्र ग्रहण के दौरान सिर्फ चांद का एक भाग पृथ्वी की छाया में प्रवेश करता है। चंद्रमा के धरती की तरफ वाले हिस्से पर धरती की छाया काली दिखाई देती है, कटा हिस्सा दिखाई देता है, तो वह इस पर निर्भर करता है कि किस प्रकार सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा एक सीध में हैं।
जानिए कब लगता है सूर्य ग्रहण?
ज्योतिष के मुताबिक, जब चंद्रमा, पृथ्वी और सूर्य के बीच से गुजरता है तो सूरज की रोशनी धरती तक पहुंच नहीं पाती है, तो सूर्य ग्रहण लगता है। जब चंद्रमा, पृथ्वी और सूर्य एक लाइन में सीधे नहीं होते। इस कारण चंद्रमा सूर्य के कुछ हिस्से को ही ढक पाता है, वही अन्य सूर्य ग्रहण में लोकेशन के कारण भी आंशिक सूर्य ग्रहण दिखता है।वलयाकार सूर्य ग्रहण तब लगता है जब चंद्रमा पृथ्वी से दूर हो। तब यह पूरी तरह सूर्य को ढक नहीं पाता, जिस कारण हमें सूर्य ग्रहण के दौरान आसमान में एक ‘आग की रिंग’ दिखती है।
राशियों पर कैसा रहेगा चन्द्र ग्रहण का असर?
पितृ पक्ष के दौरान लगने वाला चंद्र ग्रहण कर्क, मीन, मकर, मिथुन, वृश्चिक और धनु राशि वालों के लिए लकी साबित हो सकता है। जातकों को आकस्मिक धनलाभ, काम- कारोबार में तरक्की, नौकरीपेशा को पदोन्नति और निवेश से लाभ मिल सकता है। अविवाहितों को विवाह के प्रस्ताव मिल सकते हैं।देश- विदेश की यात्रा और रुका हुआ धन वापस मिल सकता है।संपत्ति खरीदने या वाहन लेने के लिए भी समय शुभ है। वृषभ, सिंह, कन्या, तुला, और कुंभ राशि वालों पर मिला जुला असर रहेगा।
ग्रहण में क्या करें और क्या नहीं?
- ग्रहण के सूतक काल में पूजा पाठ बंद कर देना चाहिए।घर के पूजा वाले स्थान को पर्दे से ढक देना चाहिए।
- ग्रहण के दौरान खाना-पीना नही चाहिए। खाद्य पदार्थों में तुलसी के पत्ते डालकर रखना चाहिए
- गर्भवती महिलाओं को ग्रहण के दौरान विशेष सावधानी बरतनी चाहिए, उन्हें घर से बाहर नहीं निकलना चाहिए और न ही ग्रहण देखना चाहिए।
- ग्रहण के सूतक काल में भोजन बनाना, खाना, सोना, बाल काटना, तेल लगाना, सिलाई-कढ़ाई करना और चाकू चलाना नहीं चाहिए।
- नंगी आंखों से चंद्र ग्रहण को देखने की भूल न करें।
- ग्रहण की समाप्ति के बाद घर और पूजा स्थल को गंगाजल का छिड़काव करके शुद्ध करना चाहिए।
- भगवान की पूजा करके दान करना शुभ माना जाता है।
(Disclaimer : यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों और जानकारियों पर आधारित है, MP BREAKING NEWS किसी भी तरह की मान्यता-जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। हमारा उद्देश्य महज सूचना पहुंचाना है। इन पर अमल लाने से पहले अपने ज्योतिषाचार्य या पंडित से संपर्क करें)





