VIDEO: लॉकडाउन के बीच अनोखे अंदाज में हुई थाना प्रभारी की विदाई

VIDEO: लॉकडाउन के बीच अनोखे अंदाज में हुई थाना प्रभारी की विदाई

बड़वानी| लॉकडाउन (Lockdown) के बीच मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के एक थाना प्रभारी की विदाई सुर्ख़ियों में है| बड़वानी जिले के राजपुर थाना प्रभारी अनिल बामनिया को पुलिस स्टाफ ने शानदार तरीके से विदाई दी| शहर में जुलूस के रूप में अनिल बामनिया पुलिसकर्मियों के साथ निकले|

दरअसल, राजपुर थाना प्रभारी अनिल बामनिया बुधवार को तबादला हुआ है| उन्हें राजपुर से इंदौर भेजा गया है| ट्रान्सफर होने के बाद राजपुर थाना प्रभारी को स्टाफ ने शानदार बिदाई देकर बिदा किया| स्टाफ द्वारा अनिल बामनिया को थाने से ढोल के साथ नगर की सीमा के बाहर तक पैदल ले जाकर बिदाई दी। रास्ते में लोगो ने थाना प्रभारी का स्वागत किया। युवा उनके साथ सेल्फ़ी लेते नजर आये है। वहीं एक वृद्ध महिला उनके गले लगकर रोते हुए नजर आई| कम समय में ही अनिल बामनिया ने लोगों के बीच लोकप्रियता हासिल कर ली थी| जिसकी तसवीद उनके विदाई के दौरान देखने को मिली|

सोशल डिस्टेंस और लॉक डाउन की उड़ाई धज्जियाँ: सलूजा
वहीं लॉक डाउन के बीच थाना प्रभारी के तबादले पर जुलूस निकलकर विदाई देने पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं| कमलनाथ के मीडिया समन्वयक नरेंद्र सलूजा ने वीडियो शेयर करते हुए ट्वीट किया है| उन्होंने गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा को टैग करते हुए लिखा ‘यह है बड़वानी जिले के राजपुर से इंदौर स्थानांतरित हुए नगर निरीक्षक अनिल बामनिया, रिलीविंग के बाद इस कोरोना महामारी में सोशल डिस्टेंस और लॉक डाउन की धज्जियां उड़ाते हुए , ढोल ढमाके के साथ जुलूस…इस महमारी में कौन सा तीर मार लिया इन्होंने ?

https://twitter.com/NarendraSaluja/status/1265976626258608130?s=09

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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