VIDEO: शव ले जाने भिड़ गए एम्बुलेंस ड्राइवर, एक दूसरे को जमकर पीटा

VIDEO: शव ले जाने भिड़ गए एम्बुलेंस ड्राइवर, एक दूसरे को जमकर पीटा

बैतूल, वाजिद खान| मध्य प्रदेश (Madhyapradesh) के बैतूल (Betul) में जिला अस्पताल परिसर में मरीजो और शवों को ले जाने के लिए एम्बुलेंस चालको के बीच खींच तान रोज की बात है। ऐसे ही एक वाद विवाद के बीच यहां दो चालक आपस में भिड़ गए। परिसर में ही गुत्थम गुत्था हुए चालको ने एक दूसरे की पिटाई शुरू कर दी। इस झगड़े में एक चालक को चोटें आई है। कोतवाली पुलिस (Police) ने मामला दर्ज कर जांच कर रही है। पिटाई का मामला सीसीटीवी (CCTV) कैमरे में कैद हो गया ।

दरअसल, यहां एक एम्बुलेंस चालक एक शव को 11 सौ रुपये के भाड़े पर उसके घर छोड़ आया। जबकि दूसरे चालक ने इसके लिए 14 सौ रुपये का भाड़ा तय किया था। इसी भाड़े को लेकर दोनों में विवाद हो गया। जिसमें सुभास की अज्जू यादव ने पिटाई कर दी। अज्जू ,सुभाष से इसलिए नाराज था क्योंकि वह कम भाड़े पर शव ले जाकर उसका नुकसान करा चुका था। दोनो की यह मारपीट अस्पताल में।लगे सीसीटीवी में कैद हो गयी। टीआई संतोष कुमार पन्द्रे के मुताबिक कोतवाली पुलिस ने सुभाष मालवीय की रिपोर्ट पर मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

संतोष पन्द्रे, टीआई कोतवाली बैतूल का कहना है कि एंबुलेंस ड्राइवर सुभाष मालवी 11 सो रुपए में शव छोड़ने गया था जब वह वापस आया तो दूसरी एंबुलेंस के ड्राइवर अज्जू यादव ने इस बात को लेकर विवाद किया कि उसने 14 सौ रुपये में तय किया था दोनों के बीच मारपीट हुई है पुलिस ने मामला दर्ज किया है|

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Gaurav Sharma
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पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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