बैतूल में ई-अटेंडेंस से बढ़ी परेशानी: 375 शिक्षकों की सैलरी रुकी, व्यवस्था पर सवाल

बैतूल में ई-अटेंडेंस सिस्टम ने बढ़ाई शिक्षकों की मुश्किलें, नेटवर्क और सर्वर समस्या के चलते 375 शिक्षकों की सैलरी रुकी, ग्रामीण इलाकों में शिक्षक पढ़ाने की जगह सिग्नल ढूंढने को मजबूर।
बैतूल में ई-अटेंडेंस से बढ़ी परेशानी: 375 शिक्षकों की सैलरी रुकी, व्यवस्था पर सवाल

मध्य प्रदेश के बैतूल जिले में सरकारी स्कूलों के शिक्षक इन दिनों एक अजीब दुविधा से गुजर रहे हैं। उन्हें तय करना पड़ रहा है कि बच्चों को पढ़ाएं या फिर मोबाइल में नेटवर्क ढूंढकर ई-अटेंडेंस लगाएं। नेटवर्क की कमी और तकनीकी समस्याओं के कारण 375 शिक्षकों की सैलरी रोक दी गई है, जिससे पूरे जिले में आक्रोश का माहौल बन गया है।

ई-अटेंडेंस का नियम और जमीनी सच्चाई

सरकार ने पारदर्शिता और समय पर उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए ई-अटेंडेंस सिस्टम लागू किया। इसके तहत हर शिक्षक को ‘हमारे शिक्षक’ ऐप पर रोजाना अपनी उपस्थिति दर्ज करनी होती है। यह सिस्टम शहरों में तो आसानी से काम कर सकता है, लेकिन ग्रामीण इलाकों में स्थिति बिल्कुल अलग है। बैतूल जैसे जिले में, जहां कई गांव अब भी नेटवर्क की समस्या से जूझ रहे हैं, वहां यह डिजिटल सिस्टम शिक्षकों के लिए परेशानी बन गया है।

नेटवर्क की कमी बनी सबसे बड़ी समस्या

बैतूल ई-अटेंडेंस विवाद की सबसे बड़ी वजह खराब इंटरनेट कनेक्टिविटी है। कई ग्रामीण स्कूल ऐसे क्षेत्रों में हैं जहां मोबाइल नेटवर्क बेहद कमजोर है या बिल्कुल नहीं आता। शिक्षकों का कहना है कि उन्हें हाजिरी लगाने के लिए कई किलोमीटर दूर जाना पड़ता है। कई बार तो वे पहाड़ियों पर चढ़कर सिग्नल पकड़ने की कोशिश करते हैं। इसके बावजूद लोकेशन और सेल्फी मैच न होने के कारण हाजिरी दर्ज नहीं हो पाती, जिससे उनकी सैलरी रोक दी जाती है।

2-3 घंटे में लगती है एक हाजिरी, पढ़ाई पर असर

बैतूल में ई-अटेंडेंस की समस्या सिर्फ नेटवर्क तक सीमित नहीं है, बल्कि सर्वर भी बड़ी बाधा बन रहा है। सुबह के समय सर्वर इतना स्लो हो जाता है कि एक हाजिरी दर्ज करने में 2 से 3 घंटे तक लग जाते हैं। इसका सीधा असर स्कूल की पढ़ाई पर पड़ रहा है। जहां शिक्षक बच्चों को पढ़ाने के लिए स्कूल आते हैं, वहीं उन्हें अपना समय मोबाइल और इंटरनेट में खर्च करना पड़ रहा है। इससे छात्रों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है।

375 शिक्षकों की सैलरी रुकी, बढ़ा आक्रोश

सबसे गंभीर बात यह है कि ई-अटेंडेंस न लगने के कारण 375 शिक्षकों की सैलरी रोक दी गई है। इस कार्रवाई से शिक्षकों में डर और नाराजगी दोनों बढ़ गए हैं। शिक्षकों का कहना है कि जब समस्या तकनीकी है, तो इसकी सजा उन्हें क्यों दी जा रही है। वहीं आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को भी इसी तरह की परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

पढ़ाएं या नेटवर्क ढूंढें?

इस पूरे मामले में शिक्षकों का सबसे बड़ा सवाल यही है, “हम बच्चों को पढ़ाएं या नेटवर्क ढूंढें?” यह सवाल सिर्फ बैतूल का नहीं, बल्कि उन सभी ग्रामीण इलाकों का है जहां डिजिटल सिस्टम लागू तो कर दिया गया है, लेकिन उसकी सुविधाएं नहीं पहुंची हैं। शिक्षकों का कहना है कि वे रोज घंटों कोशिश करते हैं, फिर भी हाजिरी नहीं लगती। इसके बावजूद सैलरी रोकना गलत है।

नियम जरूरी, समाधान की तलाश जारी

इस मामले में जिला शिक्षा अधिकारी का कहना है कि शासन के निर्देश के अनुसार ई-अटेंडेंस अनिवार्य है। प्रशासन भी इस समस्या से पूरी तरह अनजान नहीं है। अधिकारियों ने माना है कि कुछ ग्रामीण क्षेत्रों में नेटवर्क की समस्या है।

उन्होंने शिक्षकों को सलाह दी है कि जहां नेटवर्क मिले, वहां जाकर हाजिरी लगाएं। साथ ही इस समस्या को शासन तक पहुंचाया गया है और समाधान के लिए मार्गदर्शन मांगा गया है।

Bhawna Choubey
लेखक के बारे में
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