बैतूल: नुक्कड़ नाटक से दी स्वच्छता की सीख, मदिरा छोड़ने और रक्तदान का भी दिया सन्देश

बैतूल: नुक्कड़ नाटक से दी स्वच्छता की सीख, मदिरा छोड़ने और रक्तदान का भी दिया सन्देश

बैतूल, वाजिद खान| जिला चिकित्सालय (District Hospital) में एक एनजीओ के युवा कलाकारों ने नुक्कड़ नाटक के माध्यम से नव वर्ष पर स्वच्छता का संदेश दिया । जिला चिकित्सालय के सिविल सर्जन डॉ अशोक बारंगा, आरएमओ डॉ एके पांडे रक्तकोष अधिकारी (कायाकल्प प्रभारी )डॉ अंकिता सीते की उपस्थिति में हुए इस आयोजन में कलाकारों ने जिला चिकित्सालय में भर्ती मरीजों के परिजनों और आमजनों को जागरूक करने के लिए नुक्कड़ नाटक (street show) का मंचन किया ।

रक्त कोष अधिकारी डॉ अंकिता सीते का कहना है कि नुक्कड़ नाटक का संदेश है अपना अस्पताल हमारा अस्पताल और इस परिसर को स्वच्छ बनाए रखें । भारत सरकार का जो स्वच्छ भारत मिशन और कायाकल्प अभियान चलाया जा रहा है उसी को लेकर लोगों को जागरूक करने के लिए इस नुक्कड़ नाटक का आयोजन किया गया । इस नुक्कड़ नाटक के माध्यम से बताया गया कि गंदगी से कैसे बीमारी फैलती है और इसको रोकने के लिए हमें स्वच्छता पर विशेष ध्यान रखना पड़ेगा । जिला चिकित्सालय में जो मरीज भर्ती होते उनके परिजनों को खास तौर पर संदेश दिया गया कि जिला चिकित्सालय को अपना घर समझकर साफ सुथरा रखें । डॉ अंकिता सीते ने यह भी बताया कि इस नुक्कड़ नाटक के माध्यम से लोगों को संदेश दिया गया कि मदिरापान से शरीर को नुकसान होता है इसलिए इसका त्याग करें साथ ही यह भी बताया गया है कि रक्तदान करें और रक्तदान के बहुत सारे फायदे हैं ।

नाटक के माध्यम से बताया गया की लोग सार्वजनिक स्थलों पर कैसे गंदगी फैलाते हैं और इन्हें साफ सुथरा रखने के लिए क्या करना चाहिए । क्योंकि गंदगी से बीमारी फैलती है और बीमारी को रोकने के लिए हमे स्वच्छता का ध्यान रखना चाहिए ।सार्वजनिक स्थलों के साथ-साथ जिला चिकित्सालय को भी साफ स्वच्छ रखना है नुक्कड़ नाटक में मदिरापान से शरीर को होने वाले नुकसान के बारे में बताया गया तो वही रक्तदान को लेकर उसके होने वाले फायदे कोई बताए गए । नुक्कड़ नाटक देख कर जिला चिकित्सालय परिसर में उपस्थित लोगों ने सबक लिया कि वे अपने आसपास और सार्वजनिक स्थलों के अलावा जिला चिकित्सालय परिसर को भी साफ सुथरा रखेंगे ।

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पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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