शिक्षित बेरोजगारों ने चाय बेचकर किया प्रदर्शन, पुतला फूंककर जताया आक्रोश

शिक्षित बेरोजगारों ने चाय बेचकर किया प्रदर्शन, पुतला फूंककर जताया आक्रोश

बैतूल, वाजिद खान| बैतूल में आज बेरोजगार युवकों ने चाय की दुकान लगाकर चाय बेची और पुतला जलाकर अपना विरोध दर्ज कराया। युवा बेरोजगार महाआंदोलन के बैनर तले युवक यहां धरने पर बैठे । इस दौरान उन्होंने सरकार की नीतियों  पर जमकर  नाराजगी जताई। युवकों ने निजीकरण,उदारीकरण की नीतियों की भी कड़ी निंदा की।

दर्जनों की तादाद में यहां जुटे शिक्षित बेरोजगारों ने कलेक्ट्रेट के पास चाय की गुमठी लगाकर चाय बेची और अस्पताल चौराहे पर धरना दिया। यहां युवकों ने बेरोजगारी का पुतला फूंककर देश मे बढ़ रही बेरोजगारी पर चिंता जताई। युवकों ने इस मौके पर कहा कि देश मे पिछले 45 वर्षों के बाद सबसे अधिक बेरोज़गारी की दर इस समय देखने को मिल रही है।  उदारीकरण, निजीकरण, भूमंडलीकरण की आर्थिक नीतियां लादने के बाद नोटबन्दी और जीएसटी से छोटे उद्योग और व्यापारी तबाह हो गए है। निजीकरण की नीतियों से कारपोरेट घरानों के हित साधा जा रहा है। इधर युवकों ने बताया कि सिविल इंजीनियरिंग करने के बावजूद वे तीन साल से भटक रहे है।मजबूरी में उन्हें चाय बेचने को मजबूर होना पड़ रहा है।

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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