अच्छी खबर : ग्रामीणों ने लिया अपनी ग्राम पंचायत को प्लास्टिक और पॉलीथिन मुक्त बनाने का संकल्प

अच्छी खबर : ग्रामीणों ने लिया अपनी ग्राम पंचायत को प्लास्टिक और पॉलीथिन मुक्त बनाने का संकल्प

Betul News : प्लास्टिक और पॉलीथिन पर्यावरण के लिए कितनी नुकसानदायक और घातक है ये सब जानते हैं, इसका बढ़ता उपयोग पृथ्वी को बंजर बना रहा हैं, वातावरण को प्रदूषित कर रहा हैं लेकिन फिर भी इसपर प्रतिबंध नहीं लग रहा है, सरकारें कागजी आदेश निकालकर इतिश्री कर लेती हैं मगर समाज में जागरूकता की कमी के चलते प्लास्टिक और पॉलीथिन का उपयोग कम होने की जगह बढ़ रहा है, लेकिन बैतूल की एक ग्राम पंचायत ने इस पर रोक लगाने का संकल्प लिया है।

बैतूल की ग्राम पंचायत पाथाखेड़ा के ग्रामीणों ने “प्लास्टिक मुक्त मेरी ग्राम पंचायत” का संकल्प लिया है गाँव के सरपंच गुलाब राव ने निर्देश दिए हैं अब से गाँव में प्लास्टिक और पॉलीथिन के बैग का इस्तेमाल भी नहीं होगा। इनके स्थान पर जूट या फिर कपड़े के ही थैले इस्तेमाल होंगे।

ग्राम पंचायत में संचालित स्कूल के शिक्षक और शासकीय कार्यालयों के कर्मचारियों को भी निर्देशित किया गया है कि वह पानी की बोतल प्लास्टिक की बजाय मेटल की इस्तेमाल करें और बच्चों सहित दूसरों को भी प्लास्टिक के दुष्परिणामों के प्रति जागरूक करें।

ग्राम पाथाखेड़ा में इसे अभियान के रूप में चलाया जा रहा हैं, विकास खण्ड चिचोली में सीएचओ सुश्री अंकिता ने आशा कार्यकर्ता के सहयोग से गाँव में उपस्थिति में ग्रामवासियों को प्लास्टिक उपयोग के दुष्परिणाम बताये और प्लास्टिक मुक्ति अभियान पर जागरूक किया साथ ही संकल्प भी दिलाया।

उन्होंने कहा कि प्लास्टिक के अपघटित (नष्ट) होने में अनेक वर्ष लग जाते है यह पर्यावरण के लिए हानिकारक होते हैं और उसे प्रदूषित करते हैं। जब संश्लेषित पदार्थों को जलाया जाता है तो यह आसानी से पूरी तरह जल नहीं पाता है। इसे पूरी जलने में लंबा समय लगता है। प्लास्टिक का कचरा लैंडफिल साइट या पानी के स्रोतों में पहुंच जाता है तब यह एक गंभीर संकट बन जाता है। लकड़ी और कागज की तरह हम इसका दहन करके भी इसे समाप्त नहीं कर सकते इसलिए हमें प्लास्टिक और पॉलीथिन के उपयोग को बंद करना होगा।

Atul Saxena
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पत्रकारिता में तीन दशक से अधिक का अनुभव.

पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं .... View all posts by Atul Saxena →
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