अब पुलिस करेगी खुदकुशी रोकने में मदद,ये अभिनव योजना लांच

अब पुलिस करेगी खुदकुशी रोकने में मदद,ये अभिनव योजना लांच

बैतूल/वाजिद खान

बढ़ते आत्महत्या के मामले चिंता का विषय बन गए हैं। इसे लेकर बैतूल में पुलिस ने नवाचार की पहल की है। पुलिस की इस पहल से आत्महत्या रोकने में मदद मिलने की उम्मीद जागी है, जिसके लिये ASPAS (आसपास) नाम से एक अभियान शुरू किया गया है। इस  अभियान के तहत तीन हेल्पलाइन नम्बर जारी किए गए है। पुलिस की एफआरवी (फर्स्ट रिस्पांडिंक व्हीकल) भी इस अभियान में खास भूमिका निभाएगी। आत्महत्या के विचार आने पर लोग इस  हेल्पलाइन नम्बरो पर कॉल कर सकते हैं।

आत्महत्या समाधान नहीं, समस्या है। इस सूत्र वाक्य के साथ बैतूल पुलिस ने बुधवार को  आसपास अभियान की शुरुआत की । इस अभियान के तहत पुलिस ने तीन मोबाइल नम्बर जारी किए हैं- 7587627160, 7587627161, 7587627162। इन मोबाइल नम्बर को पुलिस कर्मी हैंडल करेंगे। आत्महत्या के विचार मन मे आते ही संबंधित व्यक्ति इन नम्बरों पर कॉल कर सकता है जहां पुलिस द्वारा मनोचिकित्सक और परिवार परामर्श सदस्यों से संबंधित काउंसलिंग करवाएंगे। यहां यह ध्यान रखा जाएगा कि आत्महत्या के विचार के बाद जान देने को तैयार व्यक्ति की समस्या किस तरह की है। वह पारिवारिक,आर्थिक, चिकित्सकीय या अन्य किस कारण से परेशान है। उसकी समस्या समझकर उसी तरह का परामर्श दिया जाएगा। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्रद्धा जोशी ने बताया कि यह सुविधा 24 घंटे सातों दिन जारी रहेगी जिसमें क्रिटिकल मामलों में फ़ास्ट रिस्पॉन्स व्हीकल भी मौके पर पहुंचाया जाएगा।

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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