बैतूल: सिलाई के काम ने बदल दी तकदीर, गांव में सिलेंगे शहरी बाबूओं के कपड़े

बैतूल: सिलाई के काम ने बदल दी तकदीर, गांव में सिलेंगे शहरी बाबूओं के कपड़े

बैतूल, वाजिद खान| अपनी मेहनत और लगन से बिजनेस की एबीसीडी पढ़ रही महिलाओं ने यहां अपनी कामयाबी के झंडे गाड़ना शुरू कर दिया है और उनके सपने साकार होने लगे है । अब ये महिलाएं उन अधिकारियों और कर्मचारियों की ड्रेस भी सिलेंगी जो ब्रांडेड कंपनियों और ऊंचे दर्जे के दर्जियों के सिले कपड़े पहनते है । महिलाओं के स्व सहायता समूहों को आत्मनिर्भर बनाने की कड़ी में यह नवाचार बैतूल में शुरू किया गया है। पेटीकोट सिलने वाली महिलाएं अब यहां शूट पैंट ही नही कड़क डिजायनर ब्लेजर सिलने की तैयारी कर रही है। उसी की कड़ी में वे अब सरकारी दफ्तरों के बाबू से लेकर अफसरों तक के कपडे तैयार करने की कवायद में जुटी है।

जिले में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत बनाये गए सैकड़ो स्व सहायता समूहों की महिलाएं इन दिनों अपने हुनर का जौहर दिखा रही है। इन्ही में से यहां बनाये गए 9 हाईटेक सिलाई सेंटरों में सैकड़ो महिलाएं न केवल रोजगार पा रही है बल्कि वे अपने काम धंदे की खुद मालिक बनी हुई है। यहां आठनेर स्थित केंद्र पर महिलाओं का समूह इन दिनों ब्रांडेड कपड़े तैयार कर रही है।

राजस्थान के भीलवाड़ा से कपड़ो की खरीदी और फिर उनकी कटिंग से लेकर सिलाई,पैकेजिंग और मार्केटिंग कर रही महिलाओं ने बीते लाकडाउन् से अब तक लाखो रुपये का मुनाफा कमाकर कामयाबी की इबारत लिख दी है। पेटीकोट, मास्क, शर्ट बनाकर इसका होलसेल बिजनेस कर रही महिलाये प्रदेश के अलावा पड़ोसी राज्य राजस्थान ,महाराष्ट्र तक अपने सिले कपड़े भेज रही है।

अबके उनकी तैयारी अफसरों के कपड़े सिलने की है।जिसे अफसर मिलकर कामयाब बनाने में जुटे है। यहां निर्देश दिए गए है कि प्रत्येक अधिकारी कम से कम एक जोड़ कपड़े उन समूहों से जरूर सिलवाएं।

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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