मोबाइल पर बात करने से रोकना पड़ा महंगा, नाबालिग बेटी ने दोस्तों के साथ मिलकर कर दी पिता की हत्या

मोबाइल पर बात करने से रोकना पड़ा महंगा, नाबालिग बेटी ने दोस्तों के साथ मिलकर कर दी पिता की हत्या

बैतूल, वाजिद खान| मध्यप्रदेश (Madhyapradesh) के बैतूल (Betul) से लगे सारणी से सनसनीखेज मामला सामना आया जहाँ  दो दिन पहले सारणी के पाथाखेड़ा के वार्ड क्रमांक 22 में एक घर से 45 वर्षीय श्रीराम हुरमाडे का तीन दिन पुराना शव पुलिस ने बरामद किया था| मृतक का पोस्टमार्टम कराने पर पता चला कि श्रीराम की हत्या की गई थी |

म्रतक द्वारा अपनी दत्तक पुत्री को दोस्तो के साथ घूमने व मोबाइल पर बात करने के लिए मना करने की बात को लेकर इतना गुस्सा हुई दत्तक पुत्री ने दोस्तो के साथ मिलकर श्री राम की हत्या कर दी| एसपी सीमाला प्रसाद व एडिशनल एसपी श्रद्धा जोशी ने घटना को गम्भीरता से लिया और सारणी पुलिस को निर्देश दिए जिसपर एसडीओपी के निर्देशन में सारणी टी आई महेंद्र सिंह चौहान के मार्गदर्शन में टीम बनाकर कार्यवाही की गई ।

सारणी एसडीओपी अभयराम चौधरी  ने मामले का खुलासा करते हुए बताया कि मृतक के घर से बदबू फैल रही थी मोहल्ले वालों की शिकायत पर श्रीराम के घर तलाशी लेने पर वँहा श्रीराम का शव मिला था और उसकी नाबालिग दत्तक पुत्री व एक युवक को मौके से पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया| घर से मृतक की दत्तक पुत्री व अनवर खान आजाद नगर पाथाखेड़ा,शिखर महोबे गणेश कालोनी आमला, अनिल सोनारिया पाथाखेडा को शक के आधार पर पूछताछ के लिए हिरासत में लिया था पूछताछ में आरोपियों ने अपना जुर्म स्वीकार करते हुए बताया कि मृतक श्रीराम अपनी दत्तक पुत्री को दोस्तो के साथ घूमने व मोबाइल पर बात करने के लिए मना करता था, इसी बात को लेकर चारों ने मिलकर श्रीराम की हत्या कर घर के पीछे बनी टपरिया में छिपा दिया था|  पुलिस ने आरोपियों पर अपराध क्रमांक 32/2021 धारा302 के तहत मामला दर्ज किया है।

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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