भिंड में 25 लाख रुपये के चेक बाउंस मामले में मध्य प्रदेश बीज निगम के पूर्व उपाध्यक्ष और भाजपा नेता राजकुमार कुशवाहा की कानूनी परेशानियां एक बार फिर बढ़ गई हैं। अदालत में लगातार पेश नहीं होने पर न्यायालय ने उनके खिलाफ दोबारा गिरफ्तारी वारंट जारी कर दिया है। इतना ही नहीं, पहले जारी वारंट की तामील नहीं होने पर अदालत ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी नाराजगी जताई है।
इस मामले ने एक बार फिर राजनीतिक और कानूनी गलियारों में चर्चा तेज कर दी है। अदालत ने साफ संकेत दिए हैं कि न्यायालय के आदेशों की अनदेखी किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जाएगी। अब सभी की नजर अगली सुनवाई और पुलिस की कार्रवाई पर टिकी हुई है।
कोर्ट ने क्यों जारी किया दोबारा गिरफ्तारी वारंट?
भिंड न्यायालय में चल रहे 25 लाख रुपये के चेक बाउंस मामले की सुनवाई के दौरान राजकुमार कुशवाहा अदालत में उपस्थित नहीं हुए। कोर्ट ने रिकॉर्ड में यह भी दर्ज किया कि पहले जारी गिरफ्तारी वारंट का पालन प्रभावी ढंग से नहीं कराया गया और आरोपी को न्यायालय के सामने पेश नहीं किया जा सका।
इसी को गंभीर मानते हुए अदालत ने दोबारा गिरफ्तारी वारंट जारी किया और संबंधित पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिए कि वारंट का तत्काल पालन कराया जाए तथा आरोपी की उपस्थिति सुनिश्चित की जाए।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला 25 लाख रुपये के चेक बाउंस से जुड़ा हुआ है। इस प्रकरण में राजकुमार कुशवाहा को पहले जमानत मिल चुकी है। हालांकि जमानत मिलने के बाद भी अदालत में तय तारीखों पर उपस्थित होना अनिवार्य था।
अदालत के अनुसार लगातार गैरहाजिरी और न्यायालय के आदेशों का पालन नहीं किए जाने के कारण अब सख्त रुख अपनाना जरूरी हो गया था। इसी वजह से दोबारा गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया।
पुलिस को भी कोर्ट की फटकार
सुनवाई के दौरान अदालत ने केवल आरोपी पर ही नहीं बल्कि पुलिस की कार्रवाई पर भी सवाल उठाए। कोर्ट ने कहा कि पहले जारी वारंट का सही तरीके से पालन नहीं कराया गया।
अदालत ने पुलिस अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि कानून के अनुसार त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी की गिरफ्तारी और न्यायालय में पेशी सुनिश्चित की जाए। न्यायालय ने यह भी कहा कि उसके आदेशों की अनदेखी किसी भी स्तर पर स्वीकार नहीं की जाएगी।
अगली सुनवाई पर रहेगी सबकी नजर
मामले की अगली सुनवाई 31 जुलाई 2026 को निर्धारित की गई है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि पुलिस अदालत के निर्देशों का पालन करते हुए आरोपी को पेश कर पाती है या नहीं। यदि अदालत के आदेशों का पालन नहीं होता है तो मामले में आगे और कड़ी कानूनी कार्रवाई भी हो सकती है।






