अब करोना को लेकर फैला यह अंधविश्वास

अब करोना को लेकर फैला यह अंधविश्वास

भिंड। गणेश भारद्वाज।

हम चाहे लाख वैज्ञानिकता बात करें ,आधुनिकता की बात करें लेकिन अंधविश्वास है कि हमारा पीछा छोड़ ही नहीं रहा ।वर्तमान में विश्व की सबसे बड़ी महामारी कोरोना को लेकर भी कुछ ऐसा ही है। भिंड जिले में कई लोग घर के बाहर यमदीप जला रहे हैं ।उनका यह मानना है कि ऐसा करने से यमराज प्रसन्न होते हैं और वह मृत्यु के लिए उस घर पर नहीं आते जहां पर यमदीप जलते हैं ।इसी के साथ साथ एक अफवाह यह भी फैल रही है कि घर में रखी रामचरितमानस में अगर कोई बाल मिलता है तो उसे पानी में घोलकर पीने से को रोना नहीं होगा। कई साधु-संत तो कोरोना वायरस निवारक गंडा ताबीज भी बनाकर लोगों को दे रहे हैं और उसके बदले में उनसे अच्छी खासी रकम ऐठ रहे हैं ।कोरोना से झाड़ने के लिए भी कई तांत्रिक सक्रिय हो गए हैं ।हैरत की बात यह है कि अनपढ़ों की छोड़िए कई पढ़े-लिखे लोग भी इनकी चपेट में आ रहे हैं ।हालांकि प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वह इस तरह की अंधविश्वासों में ना पड़े और कोरोना के प्रति केवल और केवल सतर्क रहकर ही अपना बचाव करें।

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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