किसानों के लिए संचालित होने वाली 14 योजनाओं पर लगेगा ग्रहण

किसानों के लिए संचालित होने वाली 14 योजनाओं पर लगेगा ग्रहण

भोपाल।

केंद्र सरकार ने प्रदेश के किसानों के लिए संचालित होने वाली 14 योजनाओं के लिए बजट में एक भी पैसा आवंटित नही किया है। जिस के कारण इन योजनाओं पर ग्रहण लग सकता है। केंद्र ने प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना में 34.42 करोड़ की वजह 102 करोड़ रुपए जारी कर दिए है। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन में 234.59 करोड़ के स्थान पर 200 करोड़ रुपए ही जारी किए है। वित्तीय वर्ष 2019-20 में मप्र को केंद्र से दो दर्जन से ज्यादा योजनाओं में 955 करोड़ 55 लाख रुपए की राशि मिलनी थी, जिसके एवज में केंद्र सरकार ने अभी तक प्रदेश को 559 करोड़ 9 लाख रुपए ही आवंटित किए हैं। जिस का सीधा असर इन योजनाओं पर पड़ेगा। केंद्र सरकार लगातार प्रदेश के बजट में कटौती करती आ रही है कई अन्य योजनाओं में भी कटौती की गई है।

इन योजनाओं के लिए नही मिली राशि
स्वाइल हेल्थ योजना में 34 करोड़ रुपए मिलाना था लेकिन कुछ नहीं मिला। इसी तरह कृषि वानिकी मिशन में 5 करोड़, ट्रेक्टर एवं कृषि उपकरणों पर अनुदान में 83.71 करोड़ के बदले भी कुछ नही मिला है। कस्टम हायरिंग सेंटर के लिए 13 करोड़, नेशनल ई-गर्वनेंस के लिए डेढ़ करोड़, सब मिशन ऑनफार्म वाटर मैनेजमेंट में 54.47 करोड़ मिलना था लेकिन सरकार ने इस के लिए बजट में कोई राशि आवटित नही की है।, सीड एंड आईल मिशन में 54.35 करोड़ के एवज में भी कुछ नही दिया है। क्लाइमेंट चेंज के लिए 8.77 करोड़, कृषि संगणना में उत्पादन 3 करोड़ नहीं मिले है।

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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