MP में गणतंत्र दिवस के समारोह के दौरान 2 छात्रों की मौत, SDM ने प्रोग्राम निरस्त दी श्रद्धांजली

MP में गणतंत्र दिवस के समारोह के दौरान 2 छात्रों की मौत, SDM ने प्रोग्राम निरस्त दी श्रद्धांजली

भोपाल।
गणतंत्र दिवस पर मध्यप्रदेश में दो बड़े हादसे हो गए। एक तरफ जहां उमरिया में पीटी परेड के दौरान ठंड लगने से एक 12 वर्षीय मासूम की मौत हो गई। वही सुसनेर में रैली के दौरान एक 14 वर्षीय छात्र की अचानक मौत हो गई। छात्र की मौत के बाद एसडीएम मनीष जैन ने मुख्य कार्यक्रम को निरस्त कर श्रदांजलि दी।घटना के बाद से ही परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।

पहली घटना उमरिया के संजय गांधी थर्मल पावर के विद्युत मंडल हायरसेकंडरी स्कूल की है।यहां रविवार सुबह गणतंत्र दिवस के अवसर पर प्रत्येक वर्ष की भांति स्कूल के मैदान पर पीटी का कार्य क्रम चल रहा था । कार्यक्रम में पांच विद्यालयों के छात्र और छात्राओं ने हिस्सा लिया था। इसमें आयुष पांडे पिता शशिकांत पांडे जूनियर वर्ग को कमांड कर रहा था। इसी दौरान वह बेहोश होकर वह गिर गया। जब उसे शहडोल ले जाया गया तो वहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।शहडोल के डॉक्टरों का कहना है कि संभवतः ठंड लगने के कारण छात्र की मौत हुई है हालांकि अभी पोस्टमार्टम रिपोर्ट नहीं आई है । पोस्टमार्टम रिपोर्ट में ही सच्चाई का खुलासा होगा।

वही दूसरी घटना आगर मालवा। जिले के सुसनेर के प्रायवेट संतोष कैथोलिक कान्वेंट स्कूल की है। यहां कक्षा 8 वी के छात्र सूरज पिता बद्रीलाल ओसारा उम्र 14 वर्ष जाती मेघवाल निवासी परसुलिया कला को अचानक चक्कर आने लगे उसके बाद अस्पताल में ले जाया गया जंहा पर डॉक्टर ने छात्र को मृत घोषित कर दिया।इस घटना की जानकारी मिलते ही क्षेत्र के विधायक राणा विक्रमसिंह सहित जनप्रतिनिधि गण और अधिकारी गण अस्पताल पहुंचे गए थे। छात्र की मौत के बाद एसडीएम मनीष जैन ने मुख्य कार्यक्रम को निरस्त कर श्रदांजलि दी।

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पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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